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मनाली-लेह मार्ग पर बनेंगी तीन बड़ी सुरंगें

केंद्र सरकार ने सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि मनाली-लेह मार्ग पर तीन नई सामरिक सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। इन सुरंगों के बनने से लद्दाख तक वर्षभर निर्बाध सडक़ संपर्क सुनिश्चित होगा और सीमा क्षेत्रों में सेना की त्वरित तैनाती तथा रसद आपूर्ति को नई मजबूती मिलेगी।

प्रस्तावित सुरंगें हिमाचल प्रदेश के बारालाचा ला, लाचुंग ला और तंगलंग ला जैसे ऊंचे एवं बर्फीले दर्रों के नीचे बनाई जाएंगी। वर्तमान में भारी हिमपात के कारण ये दर्रे हर वर्ष कई महीनों तक बंद रहते हैं, जिससे मनाली-लेह मार्ग पर यातायात प्रभावित होता है।

सुरंगों के निर्माण के बाद मौसमजनित बाधाओं का असर काफी कम हो जाएगा और यह मार्ग अधिक समय तक यातायात के लिए खुला रह सकेगा। योजना के तहत बारालाचा ला दर्रे के नीचे 13 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जिस पर लगभग 8,800 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अक्टूबर 2026 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह लाचुंग ला दर्रे के नीचे 11 किलोमीटर लंबी सुरंग प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 4,500 करोड़ रुपये होगी और इसकी डीपीआर दिसंबर 2026 तक तैयार की जाएगी।

तंगलंग ला दर्रे के नीचे 5 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया जाएगा, जिस पर करीब 2,250 करोड़ रुपये खर्च होंगे तथा इसकी डीपीआर मार्च 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। तीनों परियोजनाओं पर कुल 15,550 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं के संदर्भ में भारत की सामरिक क्षमता को और मजबूत करेगी। सुरंगों के निर्माण से सेना को सीमावर्ती क्षेत्रों तक तेजी से पहुंचने में सहायता मिलेगी, वहीं सैन्य उपकरणों और आवश्यक रसद की आपूर्ति भी अधिक सुचारु एवं सुरक्षित हो सकेगी।

मनाली-लेह मार्ग पर पहले से संचालित अटल टनल तथा प्रस्तावित शिंकुला टनल के साथ ये नई सुरंगें लद्दाख को देश के अन्य हिस्सों से बेहतर ढंग से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इसके अलावा मार्ग की कुल दूरी में लगभग 50 किलोमीटर तक कमी आने की संभावना है, जिससे यात्रा समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से न केवल सेना को लाभ मिलेगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ मनाली-लेह मार्ग देश के सबसे महत्वपूर्ण सामरिक और आर्थिक गलियारों में शामिल होने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाएगा। मनाली-लेह मार्ग पर पहले से संचालित अटल टनल और प्रस्तावित शिंकुला टनल के साथ ये नई सुरंगें लद्दाख और हिमालयी क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी। इससे पर्यटन गतिविधियों में तेजी आएगी, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

सीमा सुरक्षा को मिलेगी नई ताकत

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं के मद्देनजर यह परियोजना भारत की सामरिक क्षमता को नई मजबूती देगी। सुरंगों के बनने से सेना की त्वरित तैनाती, हथियारों और अन्य जरूरी रसद की आपूर्ति पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगी।

आपातकालीन परिस्थितियों में भी सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित रहेगी। नई सुरंगों के निर्माण से मनाली-लेह मार्ग की कुल दूरी में लगभग 50 किलोमीटर तक कमी आने की संभावना है। इससे यात्रा समय कम होगा और ईंधन की भी बचत होगी। साथ ही खराब मौसम और भारी हिमपात के दौरान भी यातायात बाधित नहीं होगा।

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