फल अंदर से खराब है या खरा, मंडी के स्कूली छात्र का इंस्ट्रूमेंट बिना काटे लगा लेगा पता

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जिला मंडी के दूरदराज क्षेत्र करसोग के महोग स्कूल के एक छात्र ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए बागबानी क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी मॉडल तैयार किया है।

फल अंदर से खराब है या खरा, मंडी के स्कूली छात्र का इंस्ट्रूमेंट बिना काटे लगा लेगा पता

भंगरोटू में आयोजित जिला स्तरीय इंस्पायर मानक अवार्ड प्रदर्शनी में राजकीय पाठशाला महोग के छात्र टिकेश ठाकुर ने फू्रट क्वालिटी डिटेक्टर (फल गुणवत्ता पहचान यंत्र) प्रस्तुत कर सभी को हैरान कर दिया।

मॉडल अच्छे मानकों पर उतरने के कारण राज्य स्तरीय इंस्पायर अवार्ड के लिए चयनित हुआ है। यह मॉडल फलों की छंटनी के साथ-साथ उनके अंदर छिपी सडऩ को बिना काटे पहचानने में सक्षम है।

आमतौर पर सेब व अन्य फलों की ग्रेडिंग का कार्य श्रमिकों द्वारा हाथों से किया जाता है, जो समय लेने वाला, खर्चीला और थकाऊ होता है। कई बार फलों की अंदरूनी खराबी का पता नहीं चल पाता, जिससे पूरी खेप खराब होने का खतरा बना रहता है।

टिकेश का यह मॉडल इस समस्या का सटीक समाधान प्रस्तुत करता है। अमूमन सेब और अन्य फलों की पैदावार के बाद उनकी ग्रेडिंग (छंटनी) का काम श्रमिकों द्वारा हाथों से किया जाता है।

यह प्रक्रिया बहुत लंबी, खर्चीली और थकाऊ होती है। कई बार इनसानी आंखों से फल के अंदर की खराबी का पता नहीं चल पाता, जिससे पूरी खेप खराब होने का डर रहता है। टिकेश ने फलों की क्वालिटी और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए फ्रूट क्वालिटी डिटेक्टर तैयार किया है।

क्योंकि करसोग क्षेत्र में सेब की फसल की बचाव व सुरक्षा की अमूूमन समस्या रहती है। उक्त समस्याओं को हल करने के लिए नई विधि का शोध किया है।

एक्स-रे तकनीक की तरह करता है काम

छात्र टिकेश ने बताया कि इस मॉडल में एक कन्वेयर बेल्ट लगी है। जिस पर फल चलते हैं। मशीन के सामने एक विशेष आईआर (इन्फरा-रेड) कैमरा लगा है।

जिस तरह इनसानों का एक्स-रे करके अंदरूनी अंगों की बीमारी का पता लगाया जाता है। उसी तरह यह कैमरा फलों का एक्स-रे करता है।

यदि कोई फल अंदर से सड़ा या खराब है, तो सेपरेटर उसे तुरंत बेल्ट से बाहर कर देता है, जबकि स्वस्थ फल अलग टोकरी में जमा होते रहते हैं। अलर्ट टिकेश इस मॉडल को और अधिक आधुनिक बनाने पर काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि आगामी संस्करण में इसमें सेंसर आधारित साइज डिटेक्टर जोड़ा जाएगा, जो फलों को उनके आकार के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में बांटेगा।

साथ ही, इसमें एक ऐसी प्रणाली विकसित की जा रही है जिससे फलों की गुणवत्ता की रिपोर्ट सीधे मालिक के मोबाइल फोन पर मैसेज के जरिए पहुंच जाएगी।

इस मशीन के उपयोग से किसानों और बागवानों के समय और धन की बड़ी बचत होगी। बाजार में केवल अच्छी गुणवत्ता के फल पहुंचने से बागवानों को उनकी फसल का उचित और उच्च दाम मिल सकेगा।

शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रबुद्ध जनों ने टिकेश की इस उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण प्रतिभा का बेहतरीन उदाहरण बताया है।

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