हिमाचल में पहली बार बनेगा नया इतिहास, पंचायत चुनाव में 31214 सीटों पर होगी चुनावी महाजंग

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हिमाचल प्रदेश में पहली बार पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में नया इतिहास बनने जा रहा है। प्रदेश की राजनीति में यह इतिहास एक नये दौर की गाथा लिखेगा।

राज्य में नई पंचायतों के गठन के बाद पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को लेकर अब तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है और गांव की सरकार चुनने की तैयारियां तेज हो गई हैं।

इस बार पंचायत सदस्य से लेकर जिला परिषद तक कुल 31214 सीटों पर चुनावी शंखनाद होगा जहां हजारों उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने के लिए चुनावी मैदान में अपना दमखम दिखाएंगे।

हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज एक्ट 1994 लागू होने के बाद यह पहला अवसर होगा, जब पंचायतीराज संस्थाओं के लिए इतनी बड़ी संख्या में सीटों पर चुनावी महासंग्राम देखने को मिलेगा।

नई पंचायतों के गठन ने चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। कई क्षेत्रों में नए नेतृत्व के उभरने की संभावना है, तो कई पुराने दिग्गजों के सामने अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती होगी।

एक ही दिन में 3758 बनेंगे पंचायत प्रधान

पंचायत प्रधान के 3,758 पदों के लिए सीधा मुकाबला होने जा रहा है वहीं उपप्रधान के लिए भी 3,758 पदों पर प्रतिष्ठा की जंग बेहद की रोमांचकारी रहने वाली है। प्रदेश भर में कुल 31,214 सीटों पर चुनावी महासंग्राम छिडऩे जा रहा है और हर सीट पर स्थानीय राजनीति का तापमान लगातार बढ़ रहा है।

कांगड़ा में सबसे अधिक 6977 पदों के लिए संघर्ष

इस लोकतांत्रिक महापर्व में पंचायत सदस्य से लेकर जिला परिषद सदस्य तक कुल 31,214 सीटों पर मुकाबला होगा। सबसे अधिक 6,977 सीटों के साथ कांगड़ा जिला चुनावी रण का केंद्र बना हुआ है, वहीं लाहौल-स्पीति में सबसे कम 378 सीटों पर संघर्ष देखने को मिलेगा।

इसी तरह से बिलासपुर में 1,615, चंबा में 2,584, हमीरपुर में 1,998, किन्नौर में 635, कुल्लू में 2,043, मंडी में 4,762, शिमला में 3,523, सोलन में 2,216, सिरमौर में 2,344 और ऊना में 2,139 सीटों पर उम्मीदवारों के बीच वर्चस्व की जंग लड़ी जाएगी।

पंचायत समिति के लिए 1769 पदों पर होगी जंग

पंचायत समिति के 1,769 पदों पर राजनीतिक दलों के उम्मीदवार आमने-सामने होंगे, वहीं जिला परिषद सदस्य के 251 पदों पर भी कड़ा मुकाबला तय माना जा रहा है।

पंचायत मेंबर की 21678 सीटों पर महा मुकाबला

सत्ता का असली रण पंचायत चुनावों में देखने को मिलेगा, जहां विकास, वर्चस्व और राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर होगी। राज्य में सबसे बड़ी लड़ाई पंचायत सदस्य के 21,678 पदों पर होगी।

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