हिमाचल प्रदेश में काँगड़ा जिला में स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री बगलामुखी मंदिर बनखंडी में माता श्री बगलामुखी देवी की जयंती पर श्री बगुलामुखी मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ा और हजारों श्रद्धालुओं ने मां का आशीर्वाद प्राप्त किया।

जयंती के अवसर पर माता श्री बगलामुखी के दरबार को रंग-बिरंगे फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया। सुबह 4 बजे से ही मां के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की लम्बी-लम्बी कतारें लग गई ।
ऐसी मान्यता है कि माता की जयंती पर मंदिर में हवन करवाने का विशेष महत्व है जिससे कष्टों का निवारण होने के साथ-साथ शत्रु भय से भी मुक्ति मिलती है। माता बगलामुखी चिंता निवारक, संकट नाशिनी हैं।
देवी बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं और स्तंभन की देवी हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति का समावेश हैं।
माता बगलामुखी की उपासना शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए की जाती है। माता बगलामुखी को नौ देवियों में 8वां स्थान प्राप्त है। माता की उत्पत्ति ब्रह्मा द्वारा आराधना करने के बाद हुई थी।
कौन थीं मां बगलामुखी
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से आठवें नंबर पर स्थान प्राप्त है। वे रावण की ईष्ट देवी थीं।
धर्म-शास्त्रों के मुताबिक जब भगवान राम रावण से युद्ध करने जा रहे थे, तो उन्होंने भी मां बगलामुखी की आराधना की थी, तब भगवान राम को रावण पर जीत हासिल हुई थी।
इतना ही नहीं पांडव भी मां बगलामुखी की पूजा करते थे। कहा जाता है कि कांगड़ा में स्थित यह मंदिर महाभारत काल का है। जहां पांडवों ने ही अज्ञातवास के दौरान एक रात में इस मंदिर की स्थापना की थी।
इस मंदिर में मा बगलामुखी की गुफा के बाहर एक तरफ संकटमोचन हनुमान तथा दूसरी तरफ काल भैरव पहरा देते हैं।
पीला रंग है मंदिर की पहचान
मां बगलामुखी का यह मंदिर पीले रंग का है बल्कि, इस मंदिर की हर चीज यहां तक की माता के वस्त्र से लेकर उन्हें लगने वाले भोग तक हर चीज पीले रंग की होती है।
माना जाता है कि मां बगलामुखी भक्तों के भय को दूर करके उनके शत्रुओं और उनकी बुरी ताकतों का नाश करतीं है। इस मंदिर में मुकदमों, विवादों में फंसे लोगों के अलावा बड़े-बड़े नेता, सेलिब्रिटी इत्यादि भी विशेष पूजा करने के लिए पहुंचते हैं।
यज्ञ में डाली जाती है लाल मिर्च की आहुति
कांगड़ा जिला में स्थित इस मां बगलामुखी मंदिर में शत्रुनाशिनी और वाकसिद्धि यज्ञ होते हैं। यह यज्ञ करने से शत्रु को परास्त करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही लोगों की हर मनोकामना भी पूरी होती है। शत्रु को परास्त करने के लिए किए जाने वाले इन यज्ञ में लाल मिर्च की आहुति दी जाती है।
इन्होंने भी करवाया था शत्रुनाशिनी यज्ञ
राजनीति में विजय प्राप्त करने के लिए इस मंदिर में प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी पूजा कर चुकी हैं। वर्ष 1977 में चुनावों में हार के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मंदिर में तांत्रिक अनुष्ठान करवाया। उसके बाद वह फिर सत्ता में आईं और 1980 में देश की प्रधानमंत्री बनीं।
बतौर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े भाई प्रह्लाद मोदी मंदिर में पूजा कर चुके हैं। नोट फॉर वोट मामले में फंसे सांसद अमर सिंह, सांसद जया प्रदा, मनविंदर सिंह बिट्टा, कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर, भूपेंद्र हुड्डा, राज बब्बर की पत्नी नादिरा बब्बर, गोविंदा और गुरदास मान जैसी हस्तियां यहां आ चुकी हैं।
संकट के समय कॉमेडी किंग कपिल शर्मा भी यहां आ चुके हैं। मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ ने भी अपनी पत्नी कोबिता के साथ तांत्रिक पूजा और हवन करवाया था।
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