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हिमाचल में खुलेंगे 36 इन्क्यूबेशन सेंटर

हिमाचल के 12 जिलों में 36 इन्क्यूबेशन सेंटर खुलेंगे। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों तक उद्यमिता और तकनीकी सुविधाओं का विस्तार करने की तैयारी में है।

संस्थान की योजना प्रदेश के सभी 12 जिलों में 36 प्री-रूरल इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने की है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को अपने व्यावसायिक विचारों को स्टार्टअप में बदलने के लिए मार्गदर्शन और जरूरी सहयोग उपलब्ध करवाया जाएगा।

इसके साथ ही संस्थान अपने कैंपस में छात्राओं के लिए आवासीय सुविधाओं का भी विस्तार कर रहा है। इसके साथ ही आईआईटी मंडी में 401 बेड की क्षमता वाला गर्ल्स हॉस्टल निर्माणाधीन है।

इसके तैयार होने से संस्थान में पढऩे वाली छात्राओं को अतिरिक्त आवासीय सुविधा मिलेगी। वहीं, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा की बचत को बढ़ावा देने के लिए वेस्ट-टू-एनर्जी सिस्टम को अधिक हॉस्टल मेस तक पहुंचाने की योजना है। वर्तमान में इस तकनीक के माध्यम से रोजाना करीब 800 किलोग्राम सूखे कचरे को ईंधन में बदला जा रहा है।

छात्रों की संख्या 3.6 गुना बढ़ी

आईआईटी मंडी में हिमाचली छात्रों की संख्या बढ़ी है। साढ़े चार वर्षों में आईआईटी मंडी ने हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करवाने की दिशा में विस्तार किया है।

संस्थान में हिमाचली विद्यार्थियों की संख्या 3.6 गुना बढ़ी है, वहीं यहां कार्यरत कुल कर्मचारियों में करीब 92 प्रतिशत हिमाचल प्रदेश के निवासी हैं। संस्थान ने शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोडऩे और प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी ने हिमाचलियों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया है।

पहाड़ी खेती और जल प्रबंधन पर फोकस

ईआईटी मंडी का शोध केवल आपदाओं तक सीमित नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रिसिजन फार्मिंग एडवाइजरी और जलवायु नियंत्रित खेती पर भी काम हो रहा है। संस्थान का प्रयास है कि तकनीकी शोध को हिमाचल की स्थानीय जरूरतों से जोडक़र पहाड़ी क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान में उपयोग किया जाए।

700 करोड़ से बदलेगी आईआईटी मंडी की तस्वीर

700 करोड़ के प्रोजेक्ट से आईआईटी मंडी की तस्वीर बदलेगी। कैंपस को नई कनेक्टिविटी मिलेगी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में आधारभूत ढांचे के विस्तार के साथ कैंपस को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

संस्थान के उत्तर और दक्षिण कैंपस को जोडऩे के लिए 22 करोड़ रुपए की लागत से 3.6 किलोमीटर लंबी डबल-लेन सडक़ और 50 मीटर का पुल तैयार कर लिया गया है। वहीं, 70 मीटर लंबे एक अन्य पुल का निर्माण कार्य जारी है। संस्थान में पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान करीब 70 हजार वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्र का विस्तार किया गया है।

करोड़ों का शोध

भूस्खलन से लेकर खेती तक हिमाचल की चुनौतियों पर आईआईटी मंडी करोड़ों का शोध कर रहा है। 14 शोध परियोजनाओं के लिए 23.26 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। आईआईटी मंडी-कांगड़ा में भूस्खलन की निगरानी कर रहा है। संस्थान के अनुसार, टाटा ट्रस्ट की ओर से जलवायु नियंत्रण और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों के लिए 20 करोड़ रुपए का सहयोग दिया गया है।

67 करोड़ खर्च

आईआईटी मंडी के अनुसार, कैंपस में आपदा-प्रतिरोधी आधारभूत ढांचे के विकास पर करीब 67 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इसके अलावा लगभग 700 करोड़ रुपए के विभिन्न इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से संस्थान में शैक्षणिक, आवासीय और अन्य सुविधाओं का
विस्तार होगा।

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