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पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका भी बढ़ाएंगे : मुख्यमंत्री

हिमाचल बायोडायवर्सिटी स्टेकहोल्डर-लेड कंजरर्वेशन यूनिफाइड (हाइबिस्कस) योजना का मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को शुभारंभ किया। साथ ही इस योजना को प्रदेश भर में कार्यान्वित करने के लिए राज्य जैव विविधता बोर्ड ने दो करोड़ रुपए की राशि भी वन विभाग को जारी की है।

योजना का उद्देश्य स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली, जैव विविधता संरक्षण तथा जैविक संसाधनों के सतत् उपयोग को प्रोत्साहित करना है।

प्रदेश में जैव विविधता संरक्षण को सुदृढ़ बनाने तथा सतत आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा राज्य सरकार ने यह अहम कदम उठाया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हाइबिस्कस योजना हिमाचल की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों के लिए सतत् आजीविका के अवसर सृजित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

उन्होंने कहा कि यह योजना पारिस्थितिकी पुनर्बहाली, जलवायु अनुकूलन क्षमता बढ़ाने, औषधीय पौधों के संरक्षण तथा बाजार से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस योजना से राज्य के लगभग दो लाख किसान तथा 10,000 सामुदायिक समूह लाभान्वित होंगे।

अग्रणी राज्य बनेगा हिमाचल

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना पर्यावरण संरक्षण, सतत् विकास तथा समुदाय आधारित प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करती है तथा जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश को अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस अवसर पर प्रधान सचिव तकनीकी शिक्षा डा. अभिषेक जैन, सुशील कुमार सिंगला, निदेशक पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन तथा सदस्य सचिव, पुष्पेंद्र राणा, डा. सुरेश सी अत्री तथा वन विभाग एवं हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

औषधीय पौधों को मिलेगा बढ़ावा

हाइविक्स योजना के अंतर्गत जैव विविधता प्रबंधन समितियों को सशक्त बनाना, प्राथमिकता प्राप्त औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देना, प्राकृतिक आवासों की गुणवत्ता में सुधार करना तथा लाभों का समान और न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना इत्यादि शामिल हैं।

योजना के तहत वन भूमि, सामुदायिक, निजी तथा कृषि भूमि पर पौधारोपण, औषधीय एवं सुगंधित पौधों का संरक्षण खेती, नर्सरी विकास, क्षमता निर्माण तथा बाजार से जुड़ी आजीविका के अवसरों को बढ़ावा दिया जाएगा।

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