दिलचस्प है मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का जीवन, कभी नगर निगम में की नौकरी तो कभी दूध बेच घर का चलाया खर्च

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का बचपन बेहद सादगी भरा बीता है। कुसुम्पटी हाई स्कूल से पढ़ाई पूरी हुई तो, परिजन चाहते थे, कोई नौकरी कर लो। फिर क्या था हिमाचल प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कर दी शुरूआत।

आइए जानते हैं श्री सुक्खू के कुछ अनछुए पहलू।

राज्य सचिवालय कर्मचारियों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बचपन से लेकर मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने के किस्से सुनाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रॉकहोस्र्ट में 26 नंबर घर में बचपन बीता है।

सचिवालय में काम कर रहे कई साथी उस समय को जानते हैं। कुसुम्पटी हाई स्कूल से पढ़ाई पूरी हुई तो घरवाले चाहते थे, कोई नौकरी कर लो। यहीं पीडब्ल्यूडी इंक्वायरी में सुपरिवाइजर का काम शुरू किया, जिसमें 6.15 रुपए दिहाड़ी मिलती थी।

इसी से जेब खर्च चलता था और सभी दोस्त मिलकर रिट्ज में 1.70 रुपए का टिकट लेकर फिल्म देखते थे। आगे पढऩा था, इसलिए पीयूसी की। कालेज में सीआर का इलेक्शन जीता और फिर छात्र संघ का भी। डे कॉलेज में पढ़ाई थी, इसलिए नगर निगम की वॉटर कंप्लेंट में भी नौकरी की, जहां सुबह-शाम शिकायतें सुनते थे।

फिर दूध की एजेंसी ली और उससे खर्चा चलाया, लेकिन बचपन में ही ब्रॉकहोट्र्स में भी साथी बच्चे लीडर ही कहते थे और रुचि भी राजनीति में आने की थी। इसका मकसद पैसे कमाना नहीं था बल्कि सेवाभव मन में था।

कांग्रेस पार्टी ने एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का जिम्मा दिया और इससे पहले 2003 में नादौन से विधायक बनने का मौका मिला, लेकिन सचिवालय मेरे घर जैसा है, क्योंकि छोटा शिमला वार्ड से दो बार पार्षद रहा हूं और तब सचिवालय भी छोटा शिमला वार्ड में ही था।

नगर निगम में जब था, तब किसी कमेटी में भी सदस्य नहीं रहा। मुझे मेंबर बनाया जाता था, लेकिन मैं यह काम नहीं लेता था। सरकार में भी कभी मंत्री नहीं रहा, लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में जनसेवा की इच्छा थी। सीएम ने दौहराया कि जिसको भी कोई काम हो, सीधा मुझसे मिल सकता है।

बस सरकार का साथ दीजिए। मेरी सरकार सत्ता के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए है। इसलिए आपका सहयोग चाहिए। आम आदमी तक पहुंचने के लिए सरकारी कर्मचारियों का योगदान बहुत जरूरी है।

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