अब ब्लाइंड होने से बच जाएंगे नवजात, हमीरपुर के डा. अशोक गर्ग ने आंखों से जुड़ी बीमारी पर किया शोध
क्षेत्र चाहे प्रशासनिक सेवाओं का हो, शिक्षा का हो, स्वास्थ्य का हो, खेलों का हो या फिर राजनीति का, प्रदेश के सबसे छोटे जिले हमीरपुर ने हर क्षेत्र में बड़े-बड़े मुकाम हासिल किए हैं।
इसी फेहरिस्त में स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमीरपुर के नाम पर राष्ट्रीय स्तर की एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। जिला मुख्यालय से सटे अणुकलां से ताल्लुक रखने वाले 37 वर्षीय शिशु विशेषज्ञ डा. अशोक गर्ग को उनकी रिसर्च के लिए उन्हें एनएनएफ (नेशनल न्यूनटोलॉजी फोरम) की ओर से गोल्ड मेडल अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
एनएनएफ में गोल्ड मेडल पाने वाले डा. गर्ग देश के इकलौते शिशु विशेषज्ञ हैं। उन्हें यह सम्मान रैटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (आरओपी) में किए गए बेहतरीन शोध कार्य के लिए दिया गया है।
बताते चलें कि आरओपी नवजात शिशुओं में होने वाली एक ऐसी बीमारी है, जिसके अगर समय पर डायग्नोज न किया जाए, तो बच्चा पूरी उम्र के लिए अंधा हो सकता है।

यह बीमारी 28 दिन तक के बच्चे को हो जाती है और इसका पता नहीं चल पाता। डा. गर्ग ने इस बीमारी को लेकर यह रिसर्च की है कि एक नवजात में इस बीमारी का पता कैसे लगाया जाए, ताकि इसका समय पर उपचार हो सके।
जानकारी के मुताबिक न्यूकोन-2022 का आयोजन दो से चार दिसंबर तक कोलकाता में किया गया। यहां पूरे भारतवर्ष से आए शिशु विशेषज्ञों ने अपने-अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
सभी विशेषज्ञों में से डा. अशोक गर्ग के शोधपत्र को एनएनएफ गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। डा. गर्ग मूलत: हमीरपुर के अणु के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी जमा दो तक की पढ़ाई हिम अकेडमी पब्लिक स्कूल से पूरी की थी।
उसके बाद उन्होंने डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कालेज टांडा से 2009 में एमबीबीएस किया। आईजीएमसी शिमला से 2016 में उन्होंने बतौर शिशु विशेषज्ञ अपनी एमडी कंप्लीट की।
2020 से वे पीजीआई चंडीगढ़ में न्यूनटोलॉजी में एमडी कर रहे हैं। डा. गर्ग की धर्मपत्नी डा. संध्या चौहान मौजूदा समय में आईजीएमसी शिमला में स्किन स्पेशलिस्ट हैं।
उनका एक छोटा बेटा है। डा. गर्ग ने अपनी सफलता का श्रेय अपने गाइड डा. जोगिंद्र कुमार और डा. प्रवीन को दिया है।
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