केंद्र की निगरानी में बनेगा कालका-शिमला एनएच, राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना में मंजूर हुआ प्रोजेक्ट

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हिमाचल में नेशनल हाई-वे विकास परकेंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। आदर्श आचार संहिता खत्म होने से पहले कालका-शिमला नेशनल हाई-वे को राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एनएचडीपी) के तहत मंजूरी मिली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के बाद यह परियोजना मंजूर हुई है और इसके बाद अब केंद्र सरकार की निगरानी में कालका-शिमला नेशनल हाई-वे विकसित होगा।

एनएचडीपी के तहत भारत में प्रमुख राजमार्गों को उच्च स्तर पर उन्नत, पुनव्र्यवस्थित और चौड़ा करने का प्रावधान है। कालका-शिमला नेशनल हाई-वे को इस परियोजना के अधीन लाने से मार्ग फोरलेन में तबदील होने के बाद और विकसित होगा।

उधर, केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यह मार्ग ऐतिहासिक है और इसे हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग के तौर पर जाना जाता रहा है। 1970 के दशक में इस मार्ग को नेशनल हाई-वे का दर्जा दिया गया।

उन्होंने कहा कि किन्नौर और लाहुल-स्पीति जिलों में घरेलू और बाहरी पर्यटकों की पहुंच बढ़ेगी। यह नेशनल हाई-वे सिरमौर, शिमला, किन्नौर, लाहुल और स्पीति के साथ कुल्लू जिला के कई इलाकों को दिल्ली और चंडीगढ़ से जोड़ता है।

गौरतलब है कि कालका-शिमला नेशनल हाई-वे को फोरलेन में बदलने का काम चल रहा है। इसे चार चरणों में पूरा किया जाएगा। सोलन से कैंथलीघाट का काम दूसरे चरण में चल रहा है, जबकि कैंथलीघाट से ढली तक का काम अभी शुरू होना बाकी है।

पर्यटन कारोबार को मिलेगी गति

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना के तहत हिमाचल का यह एनएच विकसित होगा। प्रधानमंत्री के भारत को विकसित करने के प्रयासों के तहत यह परियोजना मंजूर हुई है।

एनएचडीपी फेज तीन में परवाणू से सोलन तक के हिस्से को शामिल किया गया है। 1970 के दशक में इस मार्ग को एनएच का दर्जा दिया गया। यह हाई-वे हिमाचल में पर्यटन और उद्योग की संभावनाओं को सिरे चढ़ाने में मददगार साबित होगा।

एनएचडीपी-3 में 12109 किलोमीटर लंबी सडक़ें

केंद्र सरकार ने 2005 में एनएचडीपी के तीसरे चरण को मंजूरी दी थी। इस परियोजना में 12109 किलोमीटर के फोरलेन मार्गों का चयन किया गया।

यह वो मार्ग थे जो प्रदेश की राजधानी, पर्यटन स्थल और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ते हों। इस कड़ी में कालका-शिमला एनएच को इस परियोजना के तहत लाया गया है। इससे प्रदेश में आर्थिक विकास की संभावनाएं जागृत हुई हैं।

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