ओपीएस से छूटे कर्मी सरकार से करेंगे बात, दस साल से कम सेवाकाल वालों को नहीं मिल रहा लाभ

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शिमला: ओपीएस बहाल होने के बाद उत्साहित कर्मचारी नेता अब उन रिटायर कर्मचारियों की बात भी कर रहे हैं, जो पुरानी पेंशन से छूट गए हैं।

राज्य सरकार ने ओपीएस बहाल करने को लेकर जो नियम और शर्तें तय की हैं, उनमें दस साल सेवाकाल को अनिवार्य किया गया है। प्रदेश भर में करीब 12 हजार कर्मचारी ऐसे हैं, जो 15 मई, 2003 के बाद रिटायर हुए हैं।

इनमें बहुत बड़ी संख्या उन कर्मचारियों की भी है, जिनका सेवाकाल दस साल से कम रहा है और नए नियम में इन कर्मचारियों को ओपीएस का लाभ नहीं मिल पाएगा। एनपीएस कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप ठाकुर ने बताया कि 15 मई, 2003 को ओल्ड पेंशन बंद हो गई थी।

14 मई, 2023 तक के कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन देने का फैसला लिया है। इन कर्मचारियों के लिए वो ही नियम और शर्तें तय की गई हैं, जो 15 मई, 2003 से पहले लागू ओल्ड पेंशन भोगी कर्मचारियों के लिए तय थी।

उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को 50 प्रतिशत बेसिक और डीए देने का फैसला लिया गया है, जबकि 12 साल तक रिटायर कर्मचारी 40 प्रतिशत पेंशन एडवांस ले सकते हैं।

Employees who were left out of OPS will talk to the government

इसके साथ ही फैमिली पेंशन का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि एनपीएस में 500 से 5100 रुपए के बीच में पेंशन तय हो रही थी और ओल्ड पेंशन बहाल करने के लिए कर्मचारियों को लंबा संघर्ष करना पड़ा है।

मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद ओपीएस बहाल होने का रास्ता खुला। चुनाव के बाद पहली कैबिनेट में ओपीएस का मुद्दा हल किया। नियम तय हो चुके हैं।

14 मई तक कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन देने का फैसला ले लिया गया है। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी दस साल से कम सेवाकाल की वजह से छूट रहे हैं, उन्हें ओपीएस का लाभ दिलवाने के लिए राज्य सरकार से वार्तालाप किया जाएगा।

कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय मुद्दा बनेगी पुरानी पेंशन

राज्य में ओपीएस बहाल होने के बाद अब कर्मचारी इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की तैयारी में है। इस कड़ी में जल्द ही दिल्ली में प्रदर्शन आयोजित होगा। प्रदेश भर के कर्मचारी इस प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे।

इतना ही नहीं, जिन राज्यों में चुनाव होंगे, उनमें भी ओपीएस बहाली को मुख्य मुद्दा बनाया जाएगा। केंद्र सरकार ने कर्मचारियों का पैसा निजी हाथों में लगाया है, उस पैसे को वापस लाने के लिए पत्राचार किया जा रहा है।

केंद्र से धनराशि को वापस लाने के लिए संघर्ष को आगे भी जारी रखेंगे। 14 प्रतिशत शेयर के रूप में सरकार के पास रहेगा। दिल्ली में धरना-प्रदर्शन का अभियान छेड़ा जाएगा।

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