भूकंप से हर चौथे दिन कांप रहा हिमाचल
हिमाचल प्रदेश हर चौथे दिन भूकंप का झटका झेल रहा है। राज्य में इसी साल 50 से ज्यादा बार धरती भूकंप से कांप चुकी है। मंडी में रविवार सुबह आए 3.1 की तीव्रता के भूकंप ने लोगों को फिर से दहशत से भर दिया है।
इसका केंद्र मंडी ही रहा है और इसकी गहराई जमीन के भीतर आठ किलोमीटर थी। हिमाचल में इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक भूकंपों की एक लंबी शृंखला चल रही है।
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के आंकड़ों के अनुसार राज्य के विभिन्न जिलों में दर्जनों छोटे से मध्यम तीव्रता के झटके दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे बड़ा झटका पांच जून को आया था।
चंबा-कांगड़ा सीमा पर आए इस भूकंप की तीव्रता पांच आंकी गई थी। कुल मिलाकर राज्य में जनवरी से लेकर अब तक 50 से अधिक भूकंप दो से लेकर 3.9 की तीव्रता के आ चुके हैं।
बता दें कि जनवरी में मंडी में 3.6, 2.9 और फिर 3.6 तीव्रता के झटके महसूस किए गए थे। मार्च में चंबा क्षेत्र में 3.6 और मंडी में 2.4 तीव्रता का भूकंप आया। अप्रैल में कांगड़ा में 2.7 तीव्रता का भूकंप आया।
मई में धर्मशाला के पास 3.1 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। जून-जुलाई में कांगड़ा, चंबा और लाहुल-स्पीति में कई छोटे झटके महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता 2.1 से 3.5 के बीच रही। अब दो अगस्त को मंडी में सुबह 3.1 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया।
हल्के झटकों से प्रेशर रिलीज
मंडी आईआईटी के विशेषज्ञ प्रो महेश रेड्डी गाडे बताते हैं कि हिमालय क्षेत्र में भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के टकराव से लगातार तनाव पैदा हो रहा है। यह हल्के झटके उसी तनाव के धीरे-धीरे निकलने का संकेत हैं। हिमाचल का बड़ा हिस्सा सिस्मिक जोन पांच में आता है, इसलिए यहां छोटी-छोटी हलचलें सामान्य मानी जाती हैं।
कांगड़ा, चंबा और मंडी में ज्यादा हिल रही धरती
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कांगड़ा, चंबा और मंडी जिला में सबसे ज्यादा झटके महसूस किए जा रहे हैं। बीते जून माह में ही अकेले कांगड़ा-चंबा क्षेत्र में 16 भूकंप दर्ज हुए हैं। इनमें 12 भूकंप 2.0 से 2.9 तीव्रता के रहे हैं।
तीन भूकंप तीन से 3.9 की तीव्रता के और एक भूकंप की पांच तीव्रता आंकी गई है। यह भूकंप बीते पांच जून की रात करीब 10 बजकर चार मिनट पर महसूस किया गया था।







