2024 के अंत तक भानुपल्ली से बिलासपुर के बरमाणा तक पहुंचेगी रेल लाइन

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सामरिक महत्त्व की भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी-बरमाणा ब्रॉडगेज रेलवे लाइन 2024 अंत तक विस्थापितों के शहर तक क्लीयर हो जाएगी। रेलवे विकास निगम की ओर से यह लक्ष्य निर्धारित किया है और लक्ष्य हासिल करने के लिए दु्रतगति से काम चल रहा है।

खास बात यह है कि न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मैथड पर आधारित इस रेलवे लाइन पर धरोट से बिलासपुर तक कुल 16 में से आठ टनल अब तक ब्रेक-थ्रू हो चुकी हैं, जबकि शेष का कार्य जारी है।

धरोट से लेकर बरमाणा तक कुल 20 टनल बनेंगी। इस प्रोजेक्ट पर सात हजार करोड़ रुपए लागत आने का अनुमान है। जानकारी के मुताबिक जिला की पंजाब से सटी सीमा धरोट से लेकर बैरी बरमाणा तक रेलवे लाइन की लंबाई 63.1 किलोमीटर होगी।

इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि रेल पटरी की चौड़ाई 1676 मिलीमीटर यानी 1.676 मीटर है, जबकि कालका-शिमला की पटरी की चौड़ाई एक मीटर है।

ऐसे में पूरे हिमाचल प्रदेश में 1676 मिलीमीटर चौड़ाई की पटरी वाली यह पहली ब्रॉडगेज रेलवे लाइन है। धरोट से लेकर बैरी बरमाणा तक रेलवे लाइन चार चरणों में कंप्लीट की जाएगी।

पहले तीन चरणों की सरकारी जमीन की एफसीए क्लीयरेंस हो चुकी है, जबकि चौथे चरण की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। फाइनल अप्रूवल के बाद अगली कार्रवाई आरंभ की जाएगी। इसके साथ ही निजी जमीन अधिग्रहण को लेकर भी कार्रवाई जारी है।

इसके अलावा 45.31 हेक्टेयर निजी जमीन है, जिसे अक्वायर करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया जारी है। चौथे चरण में बध्यात से लेकर बरमाणा तक कुल 2143 छोटे-बड़े पेड़-पौधे कटेंगे, जिसमें से 1021 बड़े पेड़ हैं, जबकि 1082 छोटे पेड़-पौधे तथा 40 बांस हैं।

खास बात यह है कि जितने भी पेड़-पौधे कटेंगे, उससे दोगुना पौधे रोपित किए जाएंगे। बिलासपुर के वनमंडल अधिकारी अवनि भूषण राय ने बताया कि चौथे चरण के केस की सैद्धांतिक मंजूरी आ गई है।

बरमाणा तक बारह हेक्टेयर जमीन वन विभाग के अधीन है, जिसकी क्लीयरेंस होनी है। वहीं, रेलवे विकास निगम के सहायक महाप्रबंधक अनमोल नागपाल का कहना है कि 2024 अंत तक रेलवे लाइन का कार्य बिलासपुर तक 52 किलोमीटर पूरा कर लिया जाएगा, जिसके लिए तेज गति से काम चल रहा है।

जिला उपायुक्त पंकज राय ने बताया कि रेलवे लाइन का निर्माण कार्य निर्धारित लक्ष्य के तहत पूरा करने के लिए वह खुद टाइम-टू-टाइम कार्य का निरीक्षण कर रहे हैं।

80 में से 70 हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण

रेलवे विकास निगम के सहायक महाप्रबंधक के अनुसार धरोट से लेकर बिलासपुर तक 80 हेक्टेयर प्राइवेट लैंड है, जिसमें से अब तक 70 हेक्टेयर अक्वायर कर ली गई है, जबकि शेष 10 हेक्टेयर के लिए कार्रवाई चल रही है। कुछ गांव ऐसे हैं, जहां थोड़ी-थोड़ी लैंड पर विवाद है, जिसे सुलझाया जा रहा है। उम्मीद है कि सेक्शन-19 की नोटिफिकेशन होने के बाद काम स्पीडअप होगा।

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