स्कूली बच्चों को अब वर्दी के बदले पैसे मिलेंगे : रोहित ठाकुर

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सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का कहना है कि उनकी सरकार राज्य के सरकारी स्कूलों के नौ लाख बच्चों को वर्दी खरीद कर देने के बजाय सीधे पैसे ही देगी। ये पैसे उनके खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के जरिए दिए जाएंगे।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि अभी तक इसी कार्य योजना पर विचार चल रहा है और अंतिम फैसला कैबिनेट में होगा। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर सचिवालय में ‘दिव्य हिमाचल’ से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्दी खरीद के मामले में कई तरह की दिक्कतें हैं।

एक तो वर्दी समय पर नहीं मिलती और दूसरा गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठते हैं। इससे बेहतर यह है कि सीधा पैसा ही बच्चे के खाते में दे दिया जाए, ताकि अभिभावकों के पास खुद वर्दी खरीदने का विकल्प हो।

एक अन्य सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री ने बताया कि जहां तक पूर्व भाजपा सरकार के समय आखिरी के कुछ महीनों में खोले गए स्कूलों और कालेजों की बात है, तो इन पर फैसला केस टू केस आधार पर होगा।

कैबिनेट में प्रोपोजल भेजा जा रहा है, जो स्कूल या कालेज नॉम्र्स के अनुसार नहीं होंगे या जिनमें एडमिशन नहीं होगी, उन्हें बंद कर दिया जाएगा। नए कालेजों के स्टाफ को भी अन्य संस्थानों में इस्तेमाल किया जाएगा।

यह शिक्षा की गुणवत्ता के लिए जरूरी है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्री-नर्सरी टीचर भर्ती के लिए पूर्व भाजपा सरकार के समय करीब 12 बार मामला कैबिनेट में गया है।

रिकॉर्ड देखने से पता चलता है कि इस पॉलिसी में कई बार बदलाव किए गए, लेकिन फिर भी पूर्व सरकार भर्ती नहीं कर पाई।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार इस भर्ती प्रक्रिया को पूरा करेगी और इससे पहले भर्ती की पॉलिसी को फाइनल किया जाएगा। इस बारे में बजट लैप्स नहीं होने दिया जाएगा। रोहित ठाकुर ने कहा कि आगामी कैबिनेट की बैठक में इस मामले को चर्चा के लिए लगाया जा रहा है।

पूर्व भाजपा सरकार के समय स्कूल वर्दी खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई थी। इस टेंडर के अनुसार नौ लाख बच्चों के लिए करीब 65 करोड़ से यह खरीद की जा रही थी।

वर्दियां भी एक साथ दो साल के लिए खरीदी जा रही थी। आचार संहिता के बीच टेंडर का एक चरण सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन ने पूरा कर लिया था,

लेकिन चुनाव नतीजे आने के बाद सरकार बदल गई और अब इस प्रक्रिया पर अंतिम फैसला नई सरकार अपने हिसाब से लेगी। यदि वर्दी खरीद की स्कीम को नई सरकार ने बदल दिया तो यह अपने आप में बड़ा फैसला है।

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