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घेपन झील पर देश की पहली बाढ़ चेतावनी प्रणाली स्थापित

लाहुल-स्पीति की घेपन घाट हिमनद झील पर देश की पहली हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (ग्लोफ) प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित कर दी गई है।

समुद्र तल से करीब 4100 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित यह अत्याधुनिक प्रणाली झील के जलस्तर, मौसम और आसपास के पर्यावरणीय बदलावों पर नजर रखेगी। साथ ही चंद्रा-चिनाब नदी क्षेत्र में उच्चतम बाढ़ स्तर के चिन्हांकन का काम भी 100 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है।

दोनों पहल हिमनद झीलों से संभावित बाढ़ के खतरे को कम करने और समय रहते चेतावनी देने में अहम भूमिका निभाएंगी। यह प्रणाली सेंटर फॉर डिवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्प्यूटिंग (सी-डैक) ने विकसित की है। परियोजना को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से वित्तीय सहायता दी गई है।

उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष किरण भड़ाना झील में चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के लिए लगातार प्रयासरत थीं। उन्होंने हाल ही में स्वयं घेपन झील का दौरा भी किया था, ताकि इसकी स्थिति और संभावित जोखिमों का जायजा लिया जा सके।

नवंबर 2023 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने झील के बढ़ते क्षेत्रफल को लेकर प्रशासन को जानकारी दी थी। इसके बाद से झील के जोखिमों का आकलन, वैज्ञानिक अध्ययन, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और आपदा से निपटने की तैयारियों पर काम किया जा रहा था।

अब चेतावनी प्रणाली स्थापित होने से झील की स्थिति से जुड़े आंकड़े लगातार जुटाने और संभावित खतरे का आकलन करने में मदद मिलेगी। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और प्रतिकूल मौसम के बीच प्रणाली स्थापित करने में जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, पुलिस और चिकित्सा दलों ने सहयोग दिया।

तीन उपकरणों से निगरानी

प्रणाली में तैरते उपकरण पर आधारित झील निगरानी केंद्र, स्वचालित मौसम केंद्र और हिमनद दृश्य निगरानी इकाई शामिल हैं। इनके माध्यम से जलस्तर, मौसम और पर्यावरणीय बदलावों की जानकारी जुटाई जाएगी।

प्राप्त आंकड़ों और दृश्य जानकारियों का विश्लेषण सी-डैक के उच्च क्षमता वाले संगणक मंच पर किया जाएगा। निर्धारित मानकों के आधार पर चेतावनी जारी करने, संभावित बाढ़ की परिस्थितियों का आकलन करने और बाढ़ के प्रभावों का अनुमान लगाने में यह प्रणाली मदद करेगी

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