नवरात्र पर लगा कोरोना रूपी ग्रहण

केवल घरों में रहे, कर्फ्यू, धारा 144ए जैसे हालतों के बीच नव समवंतर और चैत्र नवरात्र संवत 2077 का शुभारंभ हुआ। जिला और प्रदेश के शक्ति पीठ एवं प्रमुख तीर्थ स्थलों में वर्ष 2020 में यह नजारा खरतनाक कोरोना वाइरस के चलते भक्तों, श्रद्धालुओं को आज तक के इतिहास में शायद पहली दफा देखने को मिल रहा है। जब नवरात्र के भक्ति उत्सव के दौरान भी सुप्रसिद्ध शक्ति स्थल सूने पड़े हो। मंदिरों से घंटियों, शंख, भक्तों की कतारें सब शून्य हैं। इस व्यापक उत्सव के दौरान केवल पुजारी ने ही मंदिर में माता की जोत जगाकर शुभारंभ किए।

 बंद हैं मंदिरों के कपाट

जबकि कोरोना की सोशल डिस्टेंस्टिंग फैक्टर के पालन ने मंदिरों के कपाटों को पूरी तरह से बंद किया हुआ है। यह मंजर केवल इनसानी जान को बचाने के लिए भले ही किए गए है, लेकिन इस सब के बीच भक्तों को पहली मर्तबा देवी भगवती के दर्शनों से भी वंचित होना पड़ा है। जिला सिरमौर की बात करे तो यहां मां शैलपुत्री की प्रथम नवरात्रि को पूजा अर्चना के लिए सुप्रसिद्ध शक्ति पीठ त्रिपुर सुंदरी मां बाला सुंदरी त्रिलोकपुर में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, सहित राजस्थान इत्यादि राज्यों से प्रतिवर्ष नवरात्र अवसर पर लाखों भक्तों की कतारें दर्शनों को उमड़ती रही है। वहीं जिला मुख्यालय नाहन में कालीस्थान मंदिर, सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री रेणुकाजी, न्याय की देवी मां भंगयानी हरिपुर धार में भी हजारों श्रद्धालु नवरात्रि पर देवी दर्शनों को हाजिरी लगाते रहे हैं, लेकिन कोरोना के कहर ने इस वर्ष भक्तों को मां के दर से भी दूर कर दिया है। वंही भक्तों ने घर से मां भगवती की आराधना कार्य आरंभ कर दिया है। यह भी इस महामारी के बीच होगा कि भगवती अष्टमी अवसर पर कंजक पूजन के लिए भी कन्या भक्तों को दूसरों के घरों से नहीं मिल पाएगी। उधर पंडित, ज्योतिषियों का कहना है कि ऐसी स्थिति उन्होंने जीवनकाल में नहीं देखी। वहीं आचार्यों ने हिंदू पंचांगों के हवाले से बताया कि विश्व मे किसी वायरस से विश्व व्यापी महामारी फैलने का प्रमाण पहले ही अंकित लिख दिया गया है। बहरहाल चैत्र नवरात्र पर पहली मर्तबा शक्ति पीठों में सन्नाटा पसरा है।

घर बैठे करें माँ की भक्ति

बुधवार से चैत्र नवरात्र आरंभ हो गए है। इसी दिन से हिंदू नव वर्ष का शुभारंभ भी माना जाता है। पहले नवरात्र के उपलक्ष पर पांवटा साहिब मे भी कोरोना वायरस के चलते लोग घरों से बाहर नहीं निकले। मंदिरों के भी बंद होने से लोगों ने घरों मे बैठकर ही माता रानी के प्रथम रूप मां शैलपुत्री की आराधना की। जानकारी के मुताबिक पांवटा उपमंडल के नवरात्रि पर्व पर मंदिरों मे काफी भीड़ उमड़ती थी। लोग यहां के पांवटा-नाहन एनएच पर कटासन देवी मंदिर, पांवटा-शिलाई एनएच पर राज बन स्थित मां ला देवी मंदिर, पांवटा बाजार स्थित मां बालासुंदरी मंदिर, मतरालियों, बांगरण बाईपास आदि मंदिरों मे जाकर मां से आशीर्वाद लेते थे, लेकिन इस बार कोराना महामारी के चलते सरकार ने घरों से बाहर निकलना बंद कर दिया है, जिससे देशहित मे लोगों ने घर मे बैठकर ही पूजा अर्चना को अहमियत दी। उधर, नवरात्र पर्व के साथ ही पांवटा में इस बार व्यापारियों को काफी नुकसान होगा। बाजार के बंद रहने से लोग खरीददारी भी नही कर पाए। हालांकि प्रशासन ने गुरुवार को सुबह 10 बजे से लेकर एक बजे तक जरूरी चीजों की खरीददारी मे कर्फ्यू मे ढील दी है, जिसमें एक घर से एक व्यक्ति पैदल ही बाजार जा सकता है और धारा 144 का पालन करते हुए भीड़ नहीं बनाएगा। एक दुकान पर चार से ज्यादा लोग नही होंगे। बहरहाल इस बार के नवरात्र मे मां के जयकारे मंदिर नहीं बल्कि घरों मे सुनाई दिए। पहले नवरात्र के दिन भक्तों ने घर पर मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना कर सुख शांति की कामना की और देश को कोरोना के कहर से बचाने की भी माता रानी से प्रार्थना की। इस बार चैत्र नवरात्र बुधवार से शुरु हो गए हैं, जो आगामी दो अप्रैल तक चलेंगे।

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