सरकार ने निलंबन के बाद भंग किया कर्मचारी चयन आयोग

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हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी चयन आयोग को निलंबित करने के बाद राज्य सरकार ने इसे भंग कर दिया है, साथ ही इसके माध्यम से की जा रही भर्ती प्रक्रिया को हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग शिमला के लिए स्थानांतरित कर दिया गया है।

सरकार ने यह निर्णय शिक्षा सचिव और आईजी विजिलैंस की रिपोर्ट के आने के बाद लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश सचिवालय में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर में बीते 3 साल से पेपर लीक का सिलसिला चल रहा था।

मंगलवार सुबह जब जांच रिपोर्ट की फाइल उनके पास आई तो तथ्यों को खंगालने के बाद यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि जिन भर्ती परीक्षाओं के रोल नंबर जारी हो गए हैं, उनकी भर्ती अब लोक सेवा आयोग करेगा। इसके अलावा जिनके परिणाम निकल चुके हैं, उनकी डाक्यूमैंटेंशन होगी।

उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोग तब तक सभी भर्तियों को करता रहेगा, जब तक कोई वैकल्पिक नैशनल टैस्टिंग एजैंसी का गठन कर लिया नहीं जाता।

कर्मचारियों से दूसरे विभागों के विकल्प मांगें
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर के कर्मचारियों को सरप्लस पूल में डाल दिया गया है। उनसे दूसरे विभागों में जाने के विकल्प मांगें गए हैं, जहां पर उनकी सेवाएं समायोजित की जाएंगी।

संस्था पर उंगली उठी तो उसे भंग करना ही उचित
मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्था पर उंगली उठने के बाद उसे भंग करना ही उचित था। उन्होंने कहा कि जब गरीब मां-बाप को यह पता चलता है कि जिस भर्ती परीक्षा के लिए उसका बच्चा दिन-रात मेहनत करता है, तो उसके मन की स्थिति का खुद ही अनुमान लगाया जा सकता है।

ऐसे में किसी गरीब बच्चे के साथ धोखा न हो, उसे देखते हुए आयोग को भंग कर दिया गया है।

चयन आयोग में टॉप टू बॉटम लोग शामिल थे
सुक्खू ने कहा कि अब तक की जांच में पाया गया है कि हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर में टॉप टू बॉटम तक लोग पेपर लीक मामले में शामिल थे।

उन्होंने कहा कि इस मामले में कुछ गिरफ्तारियां भी हुई है, जबकि कई के खिलाफ जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि जांच में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिसे अभी सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

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