14 साल बाद पूरा होगा पीटीए का सपना: हरीश ठाकुर

मंडी  : अध्यापक प्राध्यापक संघ हिमाचल प्रदेश के राज्य अध्यक्ष हरीश ठाकुर ने कहा कि पीटीए शिक्षकों का 14 वर्षों का नियमितीकरण का सपना साकार होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले पांच वर्षों से लंबित 15 हजार अस्थाई शिक्षकों के मामले की अंतिम सुनवाई केस नंबर 1503 कोर्ट नंबर दो में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई।

जायज ठहराई भर्तियाँ

सुप्रीम कोर्ट ने विरोधियों की सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए हिमाचल सरकार की सभी भर्तियों को जायज ठहराते हुए उक्त मामले में हिमाचल हाईकोर्ट के दिसंबर 2014 के फैसले को बरकरार रखा गया। जिसमें हाईकोर्ट में सभी शिक्षकों को नियमित करने के आदेश जारी किए थे। 17 अप्रैल 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने भी 15 हजार अस्थाई शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया।

पीटीए संघ ने किया स्वागत

पीटीए शिक्षक संघ ने फैसले का स्वागत करते हुए इस संघर्ष में जूझ रहे सभी पीटीए शिक्षकों को बधाई दी है। साथ में सरकार का भी आभार व्यक्त किया है।  संघ ने मुख्यमंत्री शिक्षा मंत्री के साथ साथ शिक्षा सचिव व निदेशक उच्च तथा  प्रारंभिक का भी आभार व्यक्त किया है।

फैसले के लिए दिया धन्यवाद

इस अवसर पर जिला मंडी अध्यक्ष हरिओम वर्मा, महासचिव बलदेव राणा, जिला  प्रभारी दिनेश शर्मा, जिला शिमला अध्यक्ष जय लाल, जिला बिलासपुर अध्यक्ष सुनील कुमार, जिला हमीरपुर अध्यक्ष रमेश ठाकुर, जिला कांगड़ा से राजेश भाटा, जिला सोलन से जगदीश,

जिला सिरमौर से प्रताप, चंबा से विक्की शर्मा, लाहौल स्पीति जिला से सुरेंद्र, किन्नौर से किरण नेगी, जिला ऊना अध्यक्ष अमित कुमार और जिला कुल्लू अध्यक्ष सुभाष भारद्वाज और मंडी से देवेंद्र ठाकुर, मुरारी ठाकुर, रवि, संजय भारद्वाज, राजेश शर्मा भारद्वाज वर्मा, हरि सिंह ठाकुर, देवी सिंह नेगी, सुरेश कुमार,

हंसराज शर्मा, सुरेश, बलदेव राणा, परम देव शास्त्री, सोहन सिंह, शिव कुमार, कुलदीप कुमार, शमशेर सिंह, रमन कुमार, संतोष राणा, सोहन सिंह, धर्मवीर राणा, अरुण कुमार, राजेश, रविंद्र कुमार, हेमलता, गीता कुमारी, ममता, रमा और मंजुला वर्मा ने संयुक्त बयान में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है .

और साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट  के वरिष्ठ अधिवक्ता परमजीत सिंह पटवालिया अधिवक्ता मनीष पांडे अधिवक्ता करण ठाकुर का भी आभार व्यक्त किया है। जिन्होंने पीटीए शिक्षकों के पक्ष को मजबूती के साथ सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा।

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