हिमाचल प्रदेश में एयर कनेक्टिविटी-फोरलेन के साथ अब रेलवे विस्तार

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हिमाचल प्रदेश में एयरपोर्ट विस्तारीकरण व फोरलेन निर्माण के साथ रेलवे विस्तार पर भी नई उम्मीद जगी है। अंग्रेजों के समय की पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरोगेज रेलवे लाईन को ब्रॉडगेज करने की आस निचले हिमाचल के लोग वर्षों से लगा रहे हैं।

इसी बीच अंब अंदौरा से चिंतपूर्णी, ज्वालामुखी व चामुंडा माता जैसे उत्तर भारत के ख्याति प्राप्त शक्तिपीठों को रेलवे से जोडऩे के लिए वैकल्पिक रेललाइन पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

केंद्रीय रेलवे मंत्री के समक्ष पिछले कुछ समय से हिमाचल में रेलवे विस्तार के लिए लगातार हो रही पैरवी के बाद नई उम्मीद जगी है।

गौर हो कि पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में कनेक्टिविटी सबसे बड़ा मुद्दा है। पर्यटकों की आवक बढ़ाने के लिए एयर, सडक़ के साथ-साथ रेलवे विस्तार भी आवश्यक है।

हिमाचल से राजधानी दिल्ली व चंडीगढ़ सहित देश के अन्य शहरों को जोडऩे के लिए फोरलेन के कार्य जोरों पर चल रहे हैं।

इतना ही नहीं, कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण का मामला भी प्रदेश सरकार प्रमुखता से लेते हुए भूमि अधिग्रहण के कार्य को गति दे रही है।

ऐसे में अंग्रेजों के समय से चल रही रेलवे लाइन पर काम न होने के सवाल अकसर उठते हैं। उधर, कांगड़ा-चंबा के सांसद डा. राजीव भारद्वाज का कहना है कि कांगड़ा व मंडी जिलों को जोडऩे वाली रेलवे लाइन को ब्रॉडगेज करना उनकी प्राथमिकता है।

इसलिए वह पिछले कुछ समय में इस मामले को लेकर कई बार केंद्रीय रेलवे मंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। उनका कहना है कि वह कांगड़ा सहित आसपास के जिलों को रेलवे से जोडऩे के लिए वैकलिप्क योजना पर भी चर्चा कर रहे हैं।

98 साल पुरानी है पठानकोट-जोगिंद्रनगर लाइन

पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे लाइन का इतिहास अंग्रेज़ों के समय से जुड़ा है। यह लाइन कांगड़ा घाटी के पहाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरती है। यह देश की सबसे लंबी नैरोगेज रेलवे लाइन बताई जाती है।

इस रेलवे लाइन का निर्माण 1927 में शुरू हुआ था। बिना मशीनों के इस्तेमाल से दो साल में ही यह 164 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बन गई थी। यह लाइन कांगड़ा के प्रमुख शहरों और मंडी जिला के जोगिंद्रनर को जोड़ती है।

इस लाइन का सबसे ऊंचा स्थान अहजू स्टेशन है, जो 4230 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। इस लाइन पर पहले स्टीम इंजन से ट्रेनें चलाई जाती थीं, फिर डीज़ल इंजन से चलने लगीं। फिलहाल इस लाइन की खस्ताहाल स्थिति के कारण कई बार ट्रेन सेवाएं बाधित रहती हैं।

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