हिमाचल की बहुचर्चित जलोड़ी टनल की डीपीआर मंजूरी की राह साफ हो गई है। प्रदेश ने डीपीआर पर लगाई गई सभी आपत्तियों को दूर कर दिया है, जिसके बाद अब केंद्र से इसकी मंजूरी मिलने का इंतजार हो रहा है।
1775 करोड़ की यह डीपीआर है। उम्मीद है कि इसी वर्ष केंद्र सरकार इसको लेकर अपनी हरी झंडी प्रदान कर देगी। जानकारी के अनुसार जलोड़ी टनल निर्माण को लेकर केंद्र को भेजी गई डीपीआर में जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया ने कुछ आपत्तियां लगाई थीं।
करीब 1775 करोड़ की डीपीआर
जीओआई ने प्रदेश को इन ऑब्जर्वेशन को दूर करने को कहा था। इस पर लोक निर्माण विभाग के एनएच विंग ने तत्परता के साथ कार्रवाई करते हुए डीपीआर में लगाई गई आपत्तियों को दूर कर दिया और इस बावत केंद्र को फाइल प्रेषित कर दी है, जिसके बाद अब डीपीआर को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीदें भी बंध गई हैं। करीब 1775 करोड़ की यह डीपीआर है और अब गेंद पूरी तरह से केंद्र के पाले में है।
4.2 किलोमीटर लम्बी होगी टनल
प्रदेश के आनी उपमंडल के भरगोल से बंजार उपमंडल के सोझा तक बनने वाली इस टनल की लंबाई 4.2 किलोमीटर बताई गई है। आनी की ओर से टनल के मुहाने तक दो किलोमीटर और बंजार से 5.5 किलोमीटर अप्रोच रोड़ भी बनाया जाना है। जलोड़ी जोत टनल बन जाने के बाद आनी से कुल्लू की दूरी भी आठ किलोमीटर कम हो जाएगी।
वर्ष भर रहेगी गाड़ियों की आवाजाही
वहीं, टनल बनने के बाद बंजार-लुहरी-सैंज सड़क मार्ग पर साल भर गाड़ियों की आवाजाही होगी। इससे लोगों के समय के साथ-साथ पैसों की भी बचत होगी। इस टनल के बनने से वाया बंजार होते हुए शिमला से मनाली की दूरी भी करीब 40 से 50 किलोमीटर कम हो जाएगी।
यह होगा फायदा
चार किलोमीटर से अधिक लंबी प्रस्तावित इस टनल के निर्माण से कुल्लू और शिमला के बीच यात्रा को पूरी तरह बदल देगी। इस टनल के निर्माण से सेब उत्पादक, किसान और छोटे व्यापारी सीधे लाभान्वित होंगे।
वहीं, भूस्खलन और खराब मौसम के दौरान वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग मिलेगा। अब सबकी नजरें केंद्र की मंजूरी पर टिकी हैं। बता दें कि इस टनल निर्माण को लेकर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी मामला समय-समय पर केंद्र के समक्ष उठाते रहे हैं।




























