हिम टाइम्स – Him Times

बाहरी राज्यों की वोल्वो बसों ने खाली किए एचआरटीसी के कंडक्टर बैग

परिवहन क्षेत्र में शुरू हुई ‘गला काट’ प्रतिस्पर्धा हिमाचल पथ परिवहन निगम पर भारी पड़ने लगी है। समय, तकनीक, यात्रियों की जरूरतों के मुताबिक लंबे रूट के लिए कोई कारगर नीति न बनाने के कारण बाहरी राज्यों की वोल्वो बसें परिवहन निगम को करोड़ों रुपए का चूना लगा रही हैं।

दिल्ली, चंडीगढ़, हरिद्वार इत्यादि इंटरस्टेट रूटों पर चलने वाली एचआरटीसी वोल्वो बसों का किराया बाहरी राज्यों से आ रही वोल्वो से दो से अढ़ाई गुना ज्यादा है। हिमाचल से दिल्ली, चंडीगढ़ और हरिद्वार सहित बाहरी राज्यों के लिए चल रही 300 से अधिक निजी वोल्वो बसें हिमाचल पथ परिवहन निगम के लिए चुनौती बन गई हैं।

इसके मुकाबले एचआरटीसी प्रदेश के विभिन्न जिलों से दिल्ली के लिए करीब 97 बसें चला रही है। निजी बसों के कम किराए और ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा से उन्हें यात्रियों का साथ मिल रहा है।

वहीं, निजी बसों के कांट्रैक्ट कैरिज के परमिट पर स्टेज़ कैरिज की तरह संचालन किया जा रहा है। इससे प्रदेश के राजस्व और एचआरटीसी की आय को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

शिमला से दिल्ली के लिए 60 से 70, कुल्लू-मनाली से 100 से 150, धर्मशाला से 30 से 40 और बैजनाथ से करीब 20 निजी बसें संचालित हो रही हैं। इसके अलावा पालमपुर, हमीरपुर, ऊना और मंडी , चंबा सहित अन्य क्षेत्रों से भी बाहरी राज्यों के लिए बसें चल रही हैं।

शिमला से दिल्ली के लिए एचआरटीसी की वोल्वो बस का किराया करीब 1400 और पालमपुर-धर्मशाला से 1700 रुपए है, जबकि कुछ निजी बसें करीब 700 रुपए में यात्रियों को दिल्ली पहुंचा रही हैं। निजी बसों में ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।

दूसरी ओर एचआरटीसी के लिए निर्धारित नियमों और किराया व्यवस्था के बीच प्रतिस्पर्धा बनाए रखना चुनौती बन रहा है। जानकारी के तहत प्रति बस राज्य को 10 लाख तक वार्षिक नुकसान हो रहा है।

निजी बसों के संचालन से जुड़े मामले को एचआरटीसी की ओर से उच्च न्यायालय में भी उठाया गया है। परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी इस मुद्दे को केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष उठा चुके हैं।

निजी बस ऑपरेटर कांट्रैक्ट कैरिज तो केंद्र को जमा करवा रहे हैं और वहीं राज्य के प्रत्येक टोल पर टैक्स भी दे रहे हैं, लेकिन नियमों के अनुसार वे कहीं से भी यात्री को नहीं उठा सकते।

सीजन में किराया होता है तीन से पांच हजार
प्रदेश में त्योहारी सीजन चल रहा है ऐसे में यात्रियों को आवागमन के लिए पर्याप्त बसों की आवश्यकता रहती है। निजी बस ऑपरेटरों के लिए यही त्योहारी सीजन होटल कारोबार की तरह फायदेमंद लगता है, जहां किराया मनमर्जी के अनुसार लिया जाता है। जहां एचआरटीसी का किराया सभी सीजन में समान रहता है, वहीं निजी बस ऑपरेटर अब 700 से बढ़ाकर तीन से पांच हजार तक प्रति यात्री प्रति सीट किराया वसूल करते हैं।

निजी बसों में 700 में दिल्ली का सफर, निगम ले रहा 1400 रुपए
प्रदेश में दौड़ रहीं निजी वोल्वों बसों और एचआरटीसी के बीच प्रतिस्पर्धा में किराया अहम भूमिका निभा रहा है। शिमला से दिल्ली के लिए एचआरटीसी की वोल्वो बस का किराया करीब 1400 रुपए है, जबकि कुछ निजी बसें इसी मार्ग पर करीब 700 रुपए में यात्रा की सुविधा दे रही हैं।

किराए में इस बड़े अंतर के कारण यात्रियों का रुझान निजी बसों की ओर बढ़ सकता है। ऑनलाइन बुकिंग और अलग-अलग किराया विकल्प भी निजी संचालकों को प्रतिस्पर्धा में बढ़ा देते हैं।

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