हिमाचल के आसमान में गुरुवार रात अचानक एक चमक देखी गई, जिसे देख सब लोग हैरान रह गए और तरह-तरह के कयास लगाने लगे। रात करीब 8:34 से 8:40 पर यह रोशनी बिलकुल करीब से गुजरती दिखी।
इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। यह तेज रोशनी हिमाचल प्रदेश सहित अमृतसर, तरनतारन, अजनाला, गुरदासपुर, दसूआ, पठानकोट सहित कई इलाकों में दिखाई दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आसमान में दिखाई देने वाली रोशनी सामान्य बिजली की चमक या आतिशबाजी जैसी नहीं थी। कई लोगों ने इसे उल्का पिंड या किसी खगोलीय घटना से जोड़कर देखा।
कुछ लोगों ने बताया कि ऐसा लगा मानो आसमान में कोई बड़ा पटाखा छोड़ा गया हो, जबकि कुछ ने इसे कुछ सेकंड तक तेजी से आगे बढ़ते हुए देखा और फिर वह अचानक गायब हो गई।
फिलहाल इस दुर्लभ खगोलीय घटना को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फायरबॉल मीटियर समय-समय पर दिखाई देते हैं और अधिकांश मामलों में वे वायुमंडल में ही पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं।
विशेषज्ञों ने क्या कहा
विशेषज्ञों के अनुसार यह घटना ब्राइट फायरबॉल मीटियर (चमकीला अग्नि उल्का) थी। यह अंतरिक्ष से आया एक छोटा चट्टानी या धातु का टुकड़ा था, जो अत्यधिक गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने पर हवा के साथ घर्षण के कारण तेज चमकने लगा और ऊंचाई पर ही पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया।
डरने की जरूरत नहीं
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इस घटना से आम लोगों को किसी प्रकार का खतरा नहीं था और ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि इसका कोई हिस्सा पृथ्वी की सतह तक पहुंचा हो।
क्या होता मिटियोरॉयड
खगोल विज्ञान के अनुसार अंतरिक्ष में घूमने वाले छोटे पत्थर या धातु के टुकड़ों को मिटियोरॉयड कहा जाता है। जब ये पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं और घर्षण के कारण चमकते हुए जलते हैं, तो उन्हें उल्का कहा जाता है।
यदि यह उल्का असाधारण रूप से अधिक चमकीला हो, तो उसे फायरबॉल कहा जाता है। यदि इसका कोई हिस्सा जलने से बचकर पृथ्वी पर गिर जाए, तो उसे उल्का पिंड कहा जाता है।
