हिम टाइम्स – Him Times

किरतपुर से मनाली तक 29 सुरंगें बनने से 46.6 किमी कम होगी दूरी

Double lane tunnel will be built between Kangra-Chamba

किरतपुर-मनाली के बीच दूरियों को कम करने के लिए फोरलेन परियोजना के तहत 29 सुरंगों का निर्माण होगा। इसमें आठ अतिरिक्त और एक मौजूदा सुरंग भी शामिल है।

इस परियोजना के निर्माण से दोनों स्थानों के बीच की दूरी 46.6 किलोमीटर कम होगी और इससे करीब साढ़े चार घंटे के यात्रा समय की भी बचत होगी। वहीं परियोजना के तहत दोनों स्थानों की वर्तमान दूरी 237 किलोमीटर से घटकर 190 किमी कर दिया गया है।

ओडिशा के विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों और प्रेस सूचना ब्यूरो के अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल के समक्ष एनएचएआई की ओर से दी गई प्रेजेंटेशन में यह जानकारी साझा की गई है।

प्रतिनिधिमंडल ने हिमाचल के 5 दिवसीय दौरे के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के ब्राहदी ब्रिज स्थित प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट का दौरा किया।

यह इकाई एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय शिमला के तहत आती है। इस दौरान एनएचएआई के डिप्टी मैनेजर दिग्व्रत सिंह, मैनेजर टेक्रिकल अशोक कुमार झा और साइट इंजीनियर अमित ठाकुर ने परियोजना की विस्तृत जानकारी साझा की।

अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे मंडी, कुल्लू और मनाली जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में आवागमन आसान होगा।

साथ ही, यह परियोजना पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगी। उन्होंने कहा कि एनएचएआई ने सड़क सुरक्षा और पशु संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक अभिनव पहल की है।

किरतपुर-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर बिलासपुर जिले में एनएचएआई का पहला आधुनिक गौशाला केंद्र स्थापित किया गया है। जिसकी क्षमता 150 मवेशियों की है। इस गौशाला में पशुओं के लिए समुचित देखभाल की व्यवस्था की गई है।

यहां स्थायी गौशाला के साथ-साथ पशु चिकित्सक की सुविधा उपलब्ध है, ताकि घायल या बीमार पशुओं का तुरंत इलाज किया जा सके। इसके अतिरिक्त, आपातकालीन स्थिति के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है, जिससे हाईवे पर दुर्घटनाग्रस्त या भटकते पशुओं को सुरक्षित स्थान तक लाया जा सके।

प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना के व्यापक पैमाने और तकनीकी जटिलता की सराहना करते हुए एनएचएआई के प्रयासों को सराहा और कहा कि इस तरह की परियोजनाएं देश के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाई दे रही हैं।

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