हिम टाइम्स – Him Times

पहली फरवरी से प्रशासकों के हाथों में होगी पंचायत विकास कार्यों की कमान

हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण सत्ता में शनिवार से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश की 3,586 पंचायतों में पांच साल पहले चुने गए 30,000 जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है।

शनिवार आधी रात के बाद प्रदेश की सभी पंचायतें स्वत: ही भंग हो जाएंगी। हिमाचल में पहली बार पहली फरवरी से पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह पूरी तरह से प्रशासकीय व्यवस्था लागू कर दी जाएगी, जिसके लिए विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।

पंचायतों के भंग होने के साथ ही विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों की कमान अब जन प्रतिनिधियों के बजाय प्रशासकों के हाथों में होगी।

हालांकि, प्रशासक की भूमिका कौन निभाएगा, इस पर प्रदेश सरकार की अंतिम मुहर लगनी अभी बाकी है। पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में सरकार को दो विकल्प भेजे हैं।

पहले प्रस्ताव में पंचायत सचिव को ही प्रशासक की जिम्मेदारी देने की बात कही गई है, जबकि दूसरे प्रस्ताव में एक तीन सदस्यीय समिति बनाने का सुझाव है, जिसमें स्कूल प्रिंसीपल या हैडमास्टर को प्रशासक और सचिव व रोजगार सेवक को सदस्य नियुक्त किया जा सकता है। इस प्रशासनिक बदलाव का एक सीधा प्रभाव प्रदेश की आर्थिकी पर भी पड़ेगा।

वर्तमान में वार्ड सदस्यों को छोडक़र अन्य प्रतिनिधियों के मानदेय पर सरकार हर महीने करीब पांच करोड़ रुपए खर्च करती है। पंचायतों के भंग रहने की अवधि तक यह भारी-भरकम राशि सरकारी खजाने में बचत के रूप में जमा होगी।

पहली फरवरी से नई व्यवस्था का लागू होना तय है, केवल शासन स्तर पर इसके स्वरूप के आधिकारिक ऐलान का इंतजार है। बहरहाल प्रदेश की पंचायतों में पहली फरवरी से जनप्रतिनिधियों की जगह प्रशासकीय व्यवस्था लागू कर हो जाएगी।

पंचायतों में समय पर नहीं हो पाए चुनाव
पंचायतों के समय पर चुनाव न हो पाने के पीछे प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा एक बड़ी वजह रही है। मानसून के दौरान मची तबाही के बाद राज्य में आपदा एक्ट लागू किया गया था, जिसके चलते कई क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा और सड़क संपर्क अब भी पूरी तरह बहाल नहीं हो सका है।

सरकार का प्राइमरी फोकस फिलहाल आपदा प्रभावितों के पुनर्वास और राहत कार्यों पर है, इसी कारण चुनाव प्रक्रिया को फिलहाल टालना पड़ा है।

अब आगामी कुछ महीनों तक गांवों के विकास से जुड़े फैसले और रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्य सरकारी अधिकारियों द्वारा ही संचालित किए जाएंगे, जब तक कि चुनाव की नई तिथियों का ऐलान नहीं हो जाता।

Exit mobile version