हिम टाइम्स – Him Times

एम्स बिलासपुर में मायोसाइटिस पर होगा शोध

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर में अब मायोसाइटिस जैसी जटिल सूजन संबंधी बीमारियों को लेकर अत्याधुनिक शोध किया जाएगा।

संस्थान के क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी एवं रूमेटोलॉजी विभाग में होने वाले इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की कौन सी कोशिकाएं स्वयं शरीर के ऊतकों के खिलाफ प्रतिक्रिया करती हैं और बीमारी को बढ़ाने में उनकी क्या भूमिका रहती है।

अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन से वित्त पोषित इस परियोजना के तहत ऑटो रिएक्टिव इम्यून सेल्स इन मायोसाइटिस एंड देयर टार्गेट्स प्रॉस्पेक्ट्स फॉर इम्यून रिसेट विषय पर अध्ययन किया जाएगा।

शोध के माध्यम से मायोसाइटिस में शरीर की अपनी प्रतिरक्षा कोशिकाओं और उनके लक्ष्य को समझने का प्रयास होगा। मायोसाइटिस में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मांसपेशियों के खिलाफ प्रतिक्रिया करने लगती है जिससे मांसपेशियों में कमजोरी और सूजन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

यह शोध इस बात को समझने पर केंद्रित होगा कि कौन सी प्रतिरक्षा कोशिकाएं इस प्रक्रिया में सक्रिय होती हैं और वे किन लक्ष्यों को निशाना बनाती हैं। शोध में अत्याधुनिक स्पेक्ट्रल फ्लो साइटोमेट्री, सेल सॉर्टिंग और नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

जेआरएफ की नियुक्ति की जाएगी जिसके लिए उसको 37 हजार रुपए प्रतिमाह तथा एचआरए दिया जाएगा। नियुक्ति प्रारंभिक रूप से एक वर्ष के लिए होगी, जिसे प्रदर्शन और परियोजना की अवधि के आधार पर बढ़ाया जा सकता है। संबंधित पद के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 19 अगस्त निर्धारित की गई है।

बीमारी के इलाज की नई दिशा मिलने की उम्मीद

इस शोध का महत्त्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ऑटोइम्यून बीमारियों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की भूमिका को समझना इलाज को अधिक प्रभावी और लक्षित बनाने में अहम है।

शोध के लिए जेआरएफ का पद भरेगा एम्स

इस महत्त्वपूर्ण शोध परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए एम्स बिलासपुर के क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी एवं रूमेटोलॉजी विभाग में जूनियर रिसर्च फेलो (जेआरएफ) के एक पद पर नियुक्ति की जाएगी। चयनित शोधार्थी परियोजना में वैज्ञानिकों के साथ मिलकर

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