हिम टाइम्स – Him Times

पठानकोट से जोगिन्दरनगर तक रेल सेवा बंद होने से लोग परेशान

World Heritage Kalka-Shimla track

कालका -शिमला रेलमार्ग

जोगिन्दरनगर : पठानकोट से बैजनाथ पपरोला-जोगिन्दरनगर तक रेल सेवाएं पिछले करीब चार वर्षों से नियमित रूप से बंद रहने के कारण क्षेत्र की आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि केवल दो रेलगाड़ियाँ ही जोगिन्दरनगर से कांगड़ा तक चल रही हैं, जिनकी समयसारिणी भी आम लोगों के अनुकूल नहीं है।

रेल सेवा बंद होने से सभी वर्ग प्रभावित

इस मार्ग पर रेल सेवा ठप होने से गरीब वर्ग, कर्मचारी, व्यापारी, छात्र और पर्यटक सभी प्रभावित हैं, जिससे लोगों में रेलवे विभाग के प्रति गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बसों की तुलना में रेल यात्रा सस्ती होने के साथ-साथ लंबी दूरी के लिए अधिक सुविधाजनक होती है।

खासकर परिवार के साथ यात्रा के दौरान शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं रेल में उपलब्ध रहती हैं, जबकि बसों में यह सुविधा नहीं होती।

जोगिन्दरनगर से काँगड़ा तक चल रही मात्र दो रेलगाड़ियाँ

ऐसे में रेल सेवा बंद होने से आम जनजीवन पर सीधा असर पड़ा है। वर्तमान स्थिति यह है कि केवल दो रेलगाडिय़ां जोगिन्दरनगर से कांगड़ा तक ही चल रही हैं, जिनकी समयसारिणी भी आम लोगों के अनुकूल नहीं है।

अंग्रेजों ने कम अवधि में किया था रेल लाइन का निर्माण

इससे यात्रियों को मजबूरी में महंगे और असुविधाजनक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। लोगों में नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि जिस रेल लाइन का निर्माण अंग्रेजों के समय में बहुत कम अवधि में कर दिया गया था, उसी लाइन पर कंडवाल के पास क्षतिग्रस्त हुए एक पुल का निर्माण कार्य चार वर्षों बाद पूरा हो पाया है।

स्थानीय लोगों ने इसे विभाग की लापरवाही और अकर्मण्यता करार दिया है,मगर उन्होंने हैरानी जताई कि पुल बन जाने के बाद भी रेल सेवा बहाल नहीं हो पाई।

इन्होंनें की नियमित रेल सेवा की मांग

बैजनाथ के कांग्रेस नेता रविंद्र बिट्टू, रमेश चड्ढा, सुरेश फुंगरी, घनश्याम अवस्थी, मिलाप, राजकुमार कौड़ा, अनूप कौल, मुकेश और मुनीष सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने रेलवे विभाग से मांग की है कि इस समस्या का शीघ्र समाधान किया जाए और पहले की तरह पठानकोट से बैजनाथ पपरोला-जोगिन्दरनगर तक नियमित रेल सेवा बहाल की जाए।

पूर्व महासचिव ब्लॉक कांग्रेस कमेटी रमेश चड्ढा ने कहा कि भाजपा के चार-चार सांसद होने के बावजूद इस महत्त्वपूर्ण मुद्दे का समाधान नहीं हो पाया है।

ट्रायल के बाद भी आज तक बहाल नहीं हुई रेल सेवा

उन्होंने आरोप लगाया कि कंडवाल के पास बह चुके पुल के निर्माण के बाद रेलवे अधिकारियों द्वारा ट्रायल भी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद आज तक पठानकोट से बैजनाथ पपरोला तक रेल सेवा शुरू नहीं की गई है।

कांगड़ा घाटी की जीवनरेखा

स्थानीय जनता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही रेल सेवा बहाल नहीं की गई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। लोगों का कहना है कि यह रेल मार्ग कांगड़ा घाटी की जीवनरेखा है और इसकी अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।

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