हिम टाइम्स – Him Times

किसान सम्मान निधि लेने के लिए अब नई शर्त

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली 22वीं किस्त से पहले केंद्र सरकार ने किसानों के लिए एक नई और अनिवार्य शर्त लागू कर दी है। अब पीएम किसान योजना समेत केंद्र की सभी प्रमुख कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसान रजिस्ट्री और यूनिक किसान आईडी अनिवार्य कर दी गई है।

जिन किसानों की रजिस्ट्री पूरी नहीं होगी, उन्हें अगली किस्त का भुगतान नहीं किया जाएगा। इस नए निर्देश के बाद हिमाचल प्रदेश के हजारों किसानों की चिंता बढ़ गई है।

प्रदेश में पीएम किसान योजना के तहत 9 लाख 19 हजार 505 से अधिक किसान लाभ ले रहे हैं, लेकिन कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक बहुत कम किसानों की ही किसान रजिस्ट्री बन पाई है। यदि तय समय सीमा के भीतर रजिस्ट्री नहीं हुई, तो बड़ी संख्या में किसानों की 22वीं किस्त अटक सकती है।

कृषि विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा इस संबंध में राज्य के सभी किसानों के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं। विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सभी किसानों को अपना पंजीकरण लोक मित्र केंद्रो में करवाना होगा ताकि जनवरी माह में आने वाली सहायता राशि अविलम्ब किसानों के खाते में डाली जा सके।

विभाग द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि यदि किसान पंजीकरण करवाने में असमर्थ रहते हैं तो भविष्य में किसान सम्मान निधि नहीं मिल पाएगी और साथ ही अन्य योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाएगा।

अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपने भूमि रिकॉर्ड को दुरुस्त कराएं और नजदीकी कृषि कार्यालय या निर्धारित केंद्रों पर जाकर किसान रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करें, ताकि पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त समय पर प्राप्त हो सके।

वहीं इस संबंध में निदेशक भू राजस्व अभिषेक वर्मा ने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि के तहत किसान रजिस्ट्री और यूनिक किसान आईडी बनाना अनिवार्य किया गया है।

भूमि रिकॉर्ड बना सबसे बड़ी बाधा
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार किसान रजिस्ट्री आईडी बनाने में सबसे बड़ी समस्या जमाबंदी और भूमि रिकॉर्ड के अपडेट न होने की है। जिले के अधिकांश किसानों की जमीन आज भी दादा-परदादा या अन्य पूर्वजों के नाम पर दर्ज है। कई मामलों में भूमि का रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है या उसमें त्रुटियां दर्ज हैं। कहीं खाता-खसरा नंबर में गड़बड़ी है, तो कहीं रकबा, स्वामित्व और सीमाओं से जुड़ी गलत जानकारी दर्ज है। इन तकनीकी और दस्तावेजी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में किसानों की रजिस्ट्री आईडी जनरेट नहीं हो पा रही है।

पहले ही पूरी कर चुके हैं औपचारिकताएं
किसानों का कहना है कि उन्होंने पहले ही पीएम किसान योजना से जुड़ी सभी जरूरी प्रक्रियाएं जैसे ई-केवाईसी, आधार सीडिंग और बैंक खाते का सत्यापन पूरा कर लिया था। अब अचानक किसान रजिस्ट्री को अनिवार्य कर दिए जाने से परेशानी बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि रजिस्ट्री के अभाव में किस्त रोकी जाती है, तो इसका सीधा असर रबी फसलों की तैयारी, खाद-बीज की खरीद और घरेलू खर्च पर पड़ेगा। छोटे और सीमांत किसानों के लिए पीएम किसान की राशि बेहद महत्वपूर्ण होती है।

कृषि विभाग का पक्ष
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसान रजिस्ट्री भविष्य में किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी। इससे बार-बार ई-केवाईसी कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आधार कार्ड की तरह एक यूनिक किसान आईडी में किसान की जमीन, फसल, बैंक और व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रहेगी। इसके जरिए केंद्र सरकार की सभी कृषि योजनाओं का लाभ किसानों को सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा।

समय रहते समाधान जरूरी
यदि भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो राज्य के हजारों किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन और राजस्व विभाग की भूमिका अहम हो जाती है कि वे जमीन से जुड़े मामलों का त्वरित निपटारा कर किसानों को राहत दें, ताकि उन्हें केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ बिना रुकावट मिल सके।

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