हिम टाइम्स – Him Times

पब्लिक यूज को दी गई जमीन अब नहीं ले सकेंगे वापस

हिमाचल में कोई भी व्यक्ति पब्लिक यूज के लिए दी गई जमीन को वापस नहीं ले सकेगा। ऐसा यदि कोई दावा किया तो संबंधित जिला के उपायुक्त किसी शिकायत या स्वयं संज्ञान लेते हुए कार्रवाई कर सकेंगे।

ऐसा दावा करने वाले व्यक्ति को 6 महीने की कैद या 10000 तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। अब तक यदि किसी जमीन को लेकर कोई आदेश कोर्ट इत्यादि से हुए हैं तो उन्हें भी निरर्थक किया जा रहा है।

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अनुपस्थिति में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शुक्रवार को इस बारे में एक नया बिल विधानसभा में रखा है। इस कानून को हिमाचल प्रदेश लोक उपयोगिताओं के परिवर्तन का प्रतिषेध विधेयक 2025 का नाम दिया गया है।

कानून के तहत लोक उपयोगिता के दायरे में सडक़, रास्ता, नहर, नाली, तटबंध, सिंचाई योजना, जन स्वास्थ्य प्रोजेक्ट, लोक संस्थान, भवन या सरकार द्वारा निर्मित कोई भी सुविधा या सरचना शामिल है, जो जनसाधारण के लाभ के लिए उपयोग की जाती है।

यह चाहे किसी की व्यक्तिगत, कंपनी, समिति, भागीदारी फर्म, न्यास इत्यादि की भूमि पर ही क्यों न हो। इस तरह की जमीन को लेकर किसी विधि, प्रथा, रिवाज, डिक्री या कोर्ट या अन्य प्राधिकरण से निर्णय हो तो भी इसका असर नहीं होगा।

कोई भी व्यक्ति, समिति, भागीदारी फर्म या ट्रस्ट पब्लिक यूज में विघ्न नहीं डालेगा, न परिवर्तन करेगा, न ही नष्ट करेगा। न ही किसी व्यक्ति लोक अधिकार या अन्य को इस लोक उपयोगिता का दावा करने का अधिकार होगा।

यदि किसी व्यक्ति ने इसमें विघ्न डाला तो कलेक्टर यानी जिलाधीश ऐसी दखल अंदाजी के बारे में सूचना प्राप्त होने पर सुनवाई का एक अवसर संबंधित व्यक्ति को देगा।

कलेक्टर द्वारा पारित आदेश के खिलाफ कोई भी व्यक्ति 30 दिन के भीतर आयुक्त यानी मंडल आयुक्त के पास अपील दायर कर सकेगा।

30 दिन के भीतर मंडल आयुक्त की अपील पर वित्त आयुक्त को पुनरीक्षण याचिका दायर की जा सकेगी। वित्त आयुक्त का आदेश अंतिम होगा।

इस कानून में ये प्रावधान किया जा रहा है कि किसी भी सिविल न्यायालय को इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन आने वाले मामलों में किसी झगड़े का सुनवाई का अधिकार नहीं होगा।

कानून में सरकारी सिस्टम को इसे लागू करने के लिए डिफेंस भी दिया गया है। इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार के किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।

यह है नया कानून बनाने का कारण
इस बिल के उद्देश्यों और कारणों में यह लिखा गया है कि पहले लोगों ने सार्वजनिक कार्य के लिए मौखिक करार, मौखिक दान या दीर्घकालीन सार्वजनिक उपयोग के माध्यम से जमीन दान की थी और अब लोग विवाद में जाकर इसके लिए भू अधिग्रहण लागत मांग रहे हैं।

जबकि इस पब्लिक यूटिलिटी के कारण जनसाधारण के हित में अधिकार और दावे उत्पन्न हो गए हैं। इसलिए इस तरह के एक कानून की जरूरत दिख रही है। इसे पारित करने के लिए अब सदन के आखिरी दो दिन में लगाया जाएगा।

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