एमबीएम न्यूज नेटवर्क, मंडी।। कोटरुपी में भयंकर भूस्खलन ने जहाँ दर्जनों जिंदगियां लील लीं वहीं अपनों को गहरे घाव भी दे गयी. हादसे की जगह पर लोग बदहवासी में अपनों को तलाश रहे थे. लोग दुआ कर रहे थे कि उनके अपने सही-सलामत हों. रोते-बिलखते लोगों को देखकर लोगों की भी आँखे नम हो रही थीं. लेकिन कुदरत के कहर के आगे सभी बेबस थे.
इन बिलखते लोगों में कुल्लू में रहने वाली माली देवी भी थीं. इस त्रासदी में माली देवी ने अपना सब-कुछ खो दिया. पति तो पहले ही चल बसे थे, तीन बच्चे थे जिनके सहारे वह जी रही थी, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था.
माली देवी कुल्लू के बस स्टैंड में अपने जिगर के टुकड़ों का इंतज़ार कर रही थी लेकिन उसे क्या पता था कि वह उनसे कभी नहीं मिल पाएगी. वह इंतज़ार ही करती रह गयी और उसके बच्चे भयंकर त्रासदी का शिकार हो गये.
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माली देवी की दो बेटियां मुस्कान और पलक तथा बेटा अरमान छुट्टियाँ मनाने अपने गृह नगर अपने दादा-दादी के पास गये. बच्चे अपनी चाची गीता के साथ चंबा से मनाली जा रही एचआरटीसी की बस में वापिस कुल्लू आ रहे थे। मां कुल्लू बस स्टैंड पर अपने बच्चों को लेने पहुंची थी।
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देर तक बस नहीं आई तो उसे पता चला कि बस कोटरूपी के पास भूस्खलन की चपेट में आ गई है। इसके बाद तो माली देवी के पैरों तले जमीन ही खिसक गई।
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माली देवी अपने रिश्तेदारों के साथ कोटरूपी पहुंचकर अपने जिगर के टुकड़ों का इंतजार कर रही है। माली देवी के सिर से पति का साया पहले ही उठ चुका है. पिछले साल ही उसके पति की मौत हुई थी. अभी उनकी बरसी भी नहीं हुई और अब बच्चों के भी बिछुड़ने के गम ने माली देवी को पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया है।