हिम टाइम्स – Him Times

पैराग्लाइडिंग घाटी बीड़-बिलिंग से वापिस लौट रहे विदेशी पायलट

विश्व प्रसिद्ध बीड़-बिलिंग पैराग्लाइडिंग घाटी में मौसम की बेरुखी और प्रशासन के कुछ फैसलों के चलते विदेशी पैराग्लाइडिंग पायलटों का मोह भंग होने लगा है। करीब दो दर्जन देशों से लंबी उड़ानों का अभ्यास करने और पैराग्लाइडिंग का शौक पूरा करने पहुंचे विदेशी पायलट अब अपने वतन लौटने लगे हैं।

आधे से ज्यादा पायलट लौटे

अनुमान के मुताबिक घाटी में पहुंचे करीब 500 विदेशी पायलटों में से आधे से अधिक वापस जा चुके हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि 15 नवंबर तक बिलिंग घाटी में विदेशी पायलटों की मौजूदगी लगभग समाप्त हो जाएगी। बीड़-बिलिंग को दुनिया के प्रमुख पैराग्लाइडिंग स्थलों में गिना जाता है।

विदेशी पायलटों के लिए महत्त्वपूर्ण है यह घाटी

यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और लंबी उड़ानों के लिए अनुकूल माने जाने वाले मौसम के कारण हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में पायलट पहुंचते हैं। पैराग्लाइडिंग से जुड़े जानकारों के अनुसार 15 अक्तूबर से 15 नवंबर तक का समय शौकिया उड़ान या फिर लंबी दूरी की उड़ानों का अनुभव हासिल करने वाले विदेशी पायलटों के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण रहता है।

प्रभावी योजना तैयार करे सरकार

पैराग्लाइडिंग के साथ होटल, होमस्टे, टैक्सी, रेस्तरां और अन्य पर्यटन कारोबार भी जुड़े हुए हैं। विदेशी पायलट लाखों रुपए खर्च कर महज 15 से 20 दिनों के लिए इस घाटी का रुख करते हैं, लेकिन जब उन्हें खराब मौसम के कारण उड़ानें स्थगित होने या प्रशासनिक आदेशों के चलते उड़ानों पर रोक का सामना करना पड़ता है, तो उनकी योजनाएं प्रभावित होती हैं। प्रशासन को दीर्घकालिक और प्रभावी योजना तैयार करनी चाहिए।

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताएं नहीं

विश्व प्रसिद्ध बीड़-बिलिंग पैराग्लाइडिंग घाटी में पिछले वर्षों से किसी भी राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता का आयोजन नहीं होना चिंता का विषय है। प्रतियोगिताओं का आयोजन न होने से घाटी की लोकप्रियता और अंतरराष्ट्रीय पहचान को प्रभावित कर सकता है। लगातार दो वर्षों तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन न होना पर्यटन की दृष्टि से सकारात्मक संकेत नहीं माना जा सकता।

सोलो उड़ानों और अंतरराष्ट्रीय पहचान को मशहूर

बीड़-बिलिंग की पहचान केवल टैंडम पैराग्लाइडिंग तक सीमित नहीं है। यह घाटी विशेष रूप से सोलो उड़ानों, लंबी दूरी की उड़ानों तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैराग्लाइडिंग गतिविधियों के लिए जानी जाती है। दुनिया के विभिन्न देशों से आने वाले पायलट यहां उड़ान का अनुभव हासिल करने और अपनी क्षमताओं को निखारने के लिए पहुंचते हैं।

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