हिम टाइम्स – Him Times

हिमाचल में आज से महंगी हो सकती है बिजली, बोर्ड ने 90 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाने का दे रखा है प्रस्ताव

Break on smart meter campaign electricity tender canceled

शिमला : हिमाचल में 90 पैसे प्रति यूनिट बिजली दरों में बढ़ोतरी पर फैसला मंगलवार को हो सकता है। बिजली बोर्ड ने विद्युत नियामक आयोग को यह प्रस्ताव दिया है। बोर्ड मार्च महीने से बढ़ी हुई दरों को लागू करने की तैयारी में है। यानी आयोग की सहमति हुई, तो अप्रैल का बिल बढ़ी हुई दरों के साथ आएगा।

125 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वाले इन बढ़ी हुई दरों से प्रभावित होंगे। हालांकि प्रदेश सरकार ने 300 यूनिट बिजली मुफ्त करने का फैसला किया है, लेकिन बोर्ड के हालात फिलहाल ऐसे नहीं हैं कि इस गारंटी को आगामी बजट में लाया जा सके।

राज्य सरकार को बिजली बोर्ड की सबसिडी के करीब 200 करोड़ रुपए चुकाने हैं। ऐसे में 300 यूनिट तक बिजली को मुफ्त किया जाता है तो सबसिडी की रकम दोगुनी से ज्यादा हो जाएगी और राज्य सरकार सबसिडी समय पर देने में चूक जाती है, तो बिजली बोर्ड को ऋण लेकर काम चलाना पड़ेगा। ऐसे बोर्ड का घाटा बढऩे की संभावनाएं भी ज्यादा होंगी।

फिलहाल सरकार के स्तर पर भी अभी तक 300 यूनिट मुफ्त बिजली की चर्चा शुरू नहीं हुई है। बिजली बोर्ड ने नियामक आयोग को जो नया प्रस्ताव सौंपा है, उसमें बिजली की दर 90 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाने की बात कही गई है।

विद्युत नियामक आयोग ने बिजली बोर्ड की सिफारिश पर मुहर लगाई तो 126 से 300 यूनिट तक बिजली की दर 3.95 रुपए से बढक़र 4.85 रुपए प्रति यूनिट हो जाएगी। ऐसे में 300 यूनिट की खपत पर बिजली के बिल 114 रुपए से बढक़र 270 रुपए हो जाएंगे।

सीधे शब्दों में समझें तो 126 यूनिट बिजली की खपत पर बिल 497 रुपए से बढक़र 611 रुपए हो जाएगा। ऐसे ही 300 प्रति यूनिट तक बिजली की खपत करने वालों को 1185 की जगह 1455 रुपए चुकाने होंगे।

ऐसे ही 300 यूनिट से अधिक बिजली की खपत पर 5.90 रुपए के हिसाब से भुगतान करना होगा। बिजली बोर्ड ने नियामक आयोग को यह प्रस्ताव सौंपा है और इस प्रस्ताव पर आयोग को मंगलवार को मुहर लगानी है।

विद्युत नियामक आयोग की सचिव छवि नांटा ने कहा है कि बिजली की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव बोर्ड ने भेजा है। इस प्रस्ताव पर मंगलवार को चर्चा होगी।

इसके बाद आयोग तय करेगा कि बोर्ड की सिफारिश के अनुरूप ही दरों में बढ़ोतरी का फैसला लेगा। उन्होंने कहा कि आयोग का यह फैसला आगामी वित्तीय वर्ष के लिए होगा। बोर्ड ने जो सुझाव भेजा है उस पर विचार-विमर्श चल रहा है।

Related Posts

Exit mobile version