हिम टाइम्स – Him Times

हिमाचल में 2027 से दिसंबर में होंगी वार्षिक परीक्षाएं

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वर्ष 2027 से हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत दसवीं और बारहवीं बोर्ड कक्षाओं को छोडक़र अन्य सभी कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाएं दिसंबर में आयोजित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

इसके अनुरूप जनवरी से नया शैक्षणिक सत्र शुरू करने की योजना तैयार की जाएगी। यह फैसला सोमवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में शिक्षा निदेशालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया।

इस दौरान प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विकास कार्यों में तेजी लाने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई महत्त्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में स्कूलों के विकास कार्यों, परीक्षा परिणाम, रिक्त पदों, विभिन्न योजनाओं और शैक्षणिक गुणवत्ता की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में निर्णय लिया गया कि अब विकास कार्यों की हर महीने समीक्षा होगी और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। शिक्षा मंत्री ने बताया कि श्रीनिवास रामानुजन स्टूडेंट डिजिटल योजना के तहत प्रदेश के कुल 9,359 विद्यार्थी लाभार्थी हैं।

इनमें से छह जिलों के 3,089 विद्यार्थियों के बैंक खातों में प्रति विद्यार्थी 16 हजार रुपए की डीबीटी राशि पहले ही भेजी जा चुकी है, जबकि शेष 6,270 विद्यार्थियों के खातों में यह राशि 15 अगस्त से पहले जमा कर दी जाएगी।

शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों का परीक्षा परिणाम 25 प्रतिशत से कम रहा है, वहां संबंधित जिला उपनिदेशक स्वयं जाकर निरीक्षण करें और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करें।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में खराब परीक्षा परिणाम वाले 123 मामलों में विभागीय कार्रवाई जारी है और अब जिला उपनिदेशकों को भी ऐसे मामलों पर अपनी रिपोर्ट देनी होगी।

विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि समग्र शिक्षा और पीडीएनए के तहत वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक 82.37 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। इनमें 580 निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं, 285 कार्य प्रगति पर हैं, जबकि 152 कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं।

शिक्षा मंत्री ने इन कार्यों में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि जिन विद्यालयों के निर्माण कार्य स्वीकृत होने के बावजूद शुरू नहीं हुए हैं, उनकी विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत की जाए।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि पांच लाख रुपए तक के सिविल कार्य अब विद्यालय प्रबंधन समितियां अपने स्तर पर कर सकेंगी, जिससे छोटे विकास कार्यों में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि बजट उपलब्ध होने के बावजूद निर्माण कार्यों में देरी करने वाले अधिकारियों और एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 576 पद भरे जा रहे

शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के हार्ड और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए विशेष प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। वर्तमान में 576 शिक्षकों के पद भरने की प्रक्रिया जारी है, जिनमें फिजिकल एजुकेशन, टीजीटी आट्र्स, टीजीटी मेडिकल और टीजीटी नॉन-मेडिकल के पद शामिल हैं। साथ ही विभाग को सभी लंबित पदोन्नति मामलों का समयबद्ध निपटारा करने के निर्देश भी दिए गए।

स्पोर्ट्स वेबपोर्टल का किया शुभारंभ

बैठक में डी-नोटिफाइड और विलय किए गए विद्यालयों के 738 भवनों को अन्य विभागों को शीघ्र हस्तांतरित करने, अतिरिक्त शिक्षकों का युक्तिकरण कर उन्हें एकल शिक्षक और रिक्त पद वाले विद्यालयों में भेजने तथा खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 13 करोड़ रुपए के रिवॉल्विंग फंड की स्थापना का भी निर्णय लिया गया।

इसी दौरान शिक्षा विभाग के आधुनिक स्पोट्र्स वेब पोर्टल का शुभारंभ भी किया गया, जिसके माध्यम से खेल प्रतियोगिताओं, खिलाडिय़ों के डिजिटल डाटाबेस, ऑनलाइन प्रमाणपत्र, लाइव प्रसारण और खेल गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी की सुविधा उपलब्ध होगी।

शिक्षकों का होगा युक्तिकरण

शिक्षा विभाग में शिक्षकों के युक्तिकरण पर सरकार द्वारा निर्णय किया गया है। जिन प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या कम है और जहां शिक्षकों की संख्या अधिक है, वहां से अतिरिक्त शिक्षकों को एकल शिक्षक अथवा रिक्त पद वाले स्कूलों में भेजा जाएगा। इस संबंध में शिक्षा मंत्री ने विभाग को निर्देश जारी कर दिए हैं।

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