हिम टाइम्स – Him Times

भूकंप ने 11 साल पहले ही लिख दी थी नेपाल त्रासदी की पटकथा

नेपाल में साल 2015 में 7.9 की तीव्रता से आए भूकंप ने वर्तमान त्रासदी की पटकथा लिख दी थी। भूकंप के कारण ही लांगटांग ग्लेशियर कमजोर हुआ और इसके दक्षिणी हिस्से से टूटने के कारण उसी दौर में दो गांवों का अस्तित्व मिट गया था जबकि अब इसी ग्लेशियर का उत्तरी हिस्सा टूटने से त्रासदी आई है।

यह खुलासा मंडी आईआईटी के शोध में हुआ है। मंडी आईआईटी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग विंग ने सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन कर खुलासा किया है कि यह ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन से नहीं टूटा है और न ही मानव निर्मित त्रासदी है।

नेपाल में आई इस त्रासदी को मंडी आईआईटी के शोधकर्ताओं मानते हैं कि इसकी पटकथा वर्ष 2015 में आए भूकंप ने ही लिख डाली थी। मंडी आईआईटी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग विंग प्रोफेसर डेरिक्स प्रेज शुक्ला का दावा है कि हिमालय पर्वत पर स्थित लांगटांग ग्लेशियर के गिरने का कारण जलवायु परिवर्तन नहीं, बल्कि अप्रैल 2015 में आया गोरखा भूकंप है।

शोध में यह भी पाया गया है कि लगभग एक दशक पूर्व 7.9 तीव्रता से आए गोरखा भूकंप के बाद टाबो ग्लेशियर और लांगटांग ग्लेशियर कमजोर हो गए थे।

इसी कारण लांगटांग ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा हैंगिंग ग्लेशियर के रूप में बदल गया था। शोधकर्ता बताते हैं कि यदि जलवायु परिवर्तन के कारण ही यह ग्लेशियर पिघलता तो हिमालय पर्वत पर साथ लगते अन्य ग्लेशियरों पर भी जलवायु परिवर्तन का असर पड़ता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।

लांगटांग ग्लेशियर ही टूटकर गिरा है और इसी कारण नेपाल में त्रास्दी आई है। यह ग्लेशियर भूकंप के बाद से ही अस्थिर अवस्था आ गया था। शोधकर्ता डा. शुक्ला ने बताया कि जब 2015 में भूकंप आया तो लांगटांग ग्लेशियर के दक्षिणी मुख वाला हिस्सा टूटा था।

इसके टूटने से गोंपा और लांगटांग गांव पूरी तरह से मलबे में बदल गए थे। ऐसे में बीते 26 अगस्त को इसी ग्लेशियर का उत्तरी हिस्सा टूटकर गिरा है।

बीते साल लांगटांग हिमनद के पास आया था फ्लैश फ्लड

मंडी आईआईटी के शोध में खुलासा हुआ है कि लांगटांग ग्लेशियर के पास बीते साल फ्लैश फ्लड भी आया था। शोध में यह भी कहा गया है कि जब सामान्य तौर पर ग्लेशियर टूटकर गिरता तो वह एक दिशा में आगे बढ़ता जाता है, जबकि हैंगिंग ग्लेशियर टूटने के बाद तबाही करता हुआ आगे बढ़ता है। बीते साल इस ग्लेशियर के पास फलैश फ्लड़ की घटना भी देखने को मिला थी।

भूकंप ने कमजोर किया ग्लेशियर

मंडी आईआईटी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग विंग प्रोफेसर डेरिक्स प्रेज शुक्ला ने बताया है कि नेपाल में आई त्रासदी की पटकथा 11 साल पहले भूकंप ने ही लिख दी थी। भूकंप ने ही लांगटांग ग्लेशियर को कमजोर किया है और अब इसका उत्तरी हिस्सा टूटकर नेपाल त्रासदी का कारण बना है। इसके साथ टाबो ग्लेशियर भी है और उस पर भी भूकंप का असर हुआ है।

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