धरती पर ऐसे कई देसी फल और पौधे हैं, जिनकी खूबियों से आज भी ज्यादातर लोग अनजान हैं। इन्हीं में से एक है लसूढ़ा, जिसे अलग-अलग राज्यों में लसोड़ा, लमेड़ा या गोंदी भी कहा जाता है। हिमाचल में इसे लसियाड़े आ लसूड़े कहा जाता। गांवों में इसके पेड़ मिल जाते हैं। यह पेड़ सिर्फ स्वाद या छाया देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आयुर्वेद में इसे एक बहुउपयोगी औषधि माना गया है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग जल्दी बनने वाले खाने को ज्यादा पसंद करने लगे हैं। फास्ट फूड और पैकेट वाले खाद्य पदार्थ भले ही स्वादिष्ट लगते हों, लेकिन ये सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसके बावजूद लोग इनका खूब सेवन करते हैं।
प्रकृति ने हमें कई ऐसे फल और सब्जियां दी हैं जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं। इन्हीं में से एक है लसूढ़ा। लसूढ़े में कई जरूरी पोषक तत्त्व पाए जाते हैं। इसमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन और जिंक अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं। यही कारण है कि इसे सेहत के लिए काफी लाभकारी माना जाता है।
कैसे बनाएं सब्जी
लसूड़े या लसियाड़े की सब्जी बनाना बेहद आसान है, ेलेकिन सब्जी बनाने से पहले इस पर बहुत काम करना पड़ता है। पहले लसूड़े को बीच से काटा जाता है, फिर इसके बीज निकाल दिए जाते हैं। अंदर से इसमें काफी चिपचिपापन होता है, जिसे आमचूर या खट्टी चीज की मदद से दूर किया जाता है। फिर इसे अच्छी तरह से धोकर सब्जी बनाई जाती है। लसूड़े की सब्जी आमतौर पर खट्टी ही बनाई जाती है। यह काफी स्वादिष्ट होती है।
औषधीय गुण
डिहाइड्रेशन और लू से बचाव
गर्मी के दिनों में जब शरीर का पानी तेजी से सूखने लगता है, तब लसूढ़े का अचार या रस शरीर को ठंडक देने और डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करता है। यह लू से भी बचाव करता है और शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है।
इम्युनिटी मजबूत करे
अगर आप बार-बार बीमार पड़ते हैं, तो यह कमजोर इम्यून सिस्टम का संकेत हो सकता है। लसूढ़ा खाने से इम्युनिटी बढ़ती है। इसमें इम्यूनोमोड्यूलेटरी गुण पाए जाते हैं, जो किसी भी बीमारी से जल्दी छुटकारा दिलाते हैं।
फोड़े-फुंसी से राहत
लसूढ़े के पत्तों की पोटली बनाकर फोड़े-फुंसी पर बांधने से आराम मिलता है। इसके बीजों को पीसकर दाद पर लगाने से खुजली और जलन में राहत मिलती है। यह एक प्रभावी घरेलू इलाज माना जाता है, खासकर गांवों में जहां आज भी देसी नुस्खे प्रचलित हैं।
गले की खराश और खांसी में कारगर
लसूढ़े की छाल से बना काढ़ा गले की खराश, खांसी और अन्य गले की बीमारियों में लाभदायक होता है। इसकी छाल से गरारे करने से गले में जमा कफ निकल जाता है और राहत मिलती है।
फेफड़ों को मजबूत करे
यह फेफड़ों को स्वस्थ रखता है और सांस लेने की गति को बेहतर बनाता है। यह फेफड़ों की नसों को शांत करने में भी मदद करता है।
जोड़ों का दर्द छूमंतर
लसूढ़े की पत्तियों का अर्क जोड़ों के दर्द को कम कर सकता है। इसमें एंटीइंफ्लेमेंटरी गुण होते हैं, जो जोड़ों की सूजन को कम करते हैं और दर्द में आराम दिलाते हैं। इससे जोड़ों की गतिशीलता भी बढ़ जाती है।
देसी जड़ी-बूटी की ताकत
लसूढ़ा सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि एक देसी सुपर फूड है, जिसमें अनेक औषधीय गुण छिपे हैं। सही तरीके से इसका उपयोग किया जाए, तो यह गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने, त्वचा रोगों से बचाने में कारगर हो सकता है।