किसी ने नहीं छोड़ी सर्व देवता समिति

मंडी –मंडी में 22 फरवरी से शुरू हो रहे सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव से पहले देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व करने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और बढ़ गया है। सर्व देवता कार समिति की तरफ से गठित की गई देव संस्कृति संरक्षण एवं संवर्द्धन समिति के सारे आरोपों को अब देवता समिति ने निराधार बताया है। सर्व देवता कारदार समिति का कहना है कि किसी भी कारदार और अन्य सदस्य ने समिति को नहीं छोड़ा है, बल्कि कुछ लोग समिति का नाम लेकर अब राजनीति करना चाह रहे हैं, जिसे समिति कभी सहन नहीं करेगी। मंगलवार को सर्वदेवता समिति के प्रधान शिवपाल व अन्य पदाधिकारियों ने कहा है कि 1985 से सेवारत व देव संस्कृति को बचाने के लिए हमेशा प्रयासरत रही उनकी संस्था को कुछ शरारती तत्त्व झूठे व मनगढ़ंत आरोप लगाकर अपनी नेतागिरि चमकाने में लगे हैं। प्रधान ने सपष्ट किया कि चुनाव पूरे संवैधानिक तरीके से किए गए हैं।

आमसभा में चौहारघाटी, द्रंग , सराज, उतरशाल, स्नोर, बदार, सदर, तुंगल, बल्ह, सराज और बालीचौकी 70 के लगभग कारदारों की सर्वसम्मति से कार्यकारिणी चुनी गई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए देवी-देवताओं का सहारा ले रहे हैं, मगर यह सहन नहीं होगा। अगर कुछ लोगों को पहले आपत्ति थी तो वह तीन साल पदाधिकारी रहने के बाद चुप क्यों रहे। उन्होंने कहा कि सभी पंजीकृत देवी-देवताओं के कारदार सर्व देवता समिति के साथ हैं। इन कारदारों को संबंधित देवताओं की समितियों ने सर्व देवता समिति में भेजा है। सर्व देवता सेवा समिति के प्रधान ने कहा कि शिवरात्रि मेले में आने वाले देवी देवताओं के मानदेय, ठहराव व अन्य सुविधाओं को लेकर कोई समझौता नहीं होगा। इस दौरान प्रशासन से आग्रह किया गया कि देवी-देवताओं के नाम पर राजनीति करने वालों को कतई महत्त्व न दिया जाए। इस अवसर पर कई प्रमुख देवी-देवताओं के कारदार भी उपस्थित रहे।

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