Himahal: दुर्गम इलाकों से ड्रोन ढोएगा फलों की पेटियां, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग तैयार कर रहा डिजाइन

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सेब उत्पादकों सहित बागबानों को अब दुर्गम इलाकों से सेब की पेटी यातायात वाली सडक़ या घर तक पहुंचाने के लिए ड्रोन सुविधा देगा। सीधे ही बागीचे व दूरदराज स्थित पेड़ों से फल तोडऩे के बाद इसकी पेटी को ड्रोन लेकर पहुंचाएगा।

इसके लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने तैयारियां जोरों पर चलाई हुई है और इसका डिजाइन तैयार किया जा रहा है। डिजाइन पूरा होते ही इसका ट्रायल होगा और प्रथम व द्वितीय चरण के ट्रायल के सफल होने के बाद विभाग इसे मार्केट में उतारेगा, जिसे बागबान प्रयोग में लाने के लिए खरीद और किराए पर ले सकेंगे।

सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने पहले दुर्गम इलाकों में दवाइयां पहुंचाने और सैंपल लेने के लिए ड्रोन तैयार किया और इसके दो बार ट्रायल सफल होने के बाद इस सुविधा को आरंभ कर दिया गया है, जबकि बागीचों में स्प्रे करने के लिए ड्रोन का पहला सफल ट्रायल कर दिया है और द्वितीय चरण में किन्नौर में इसका ट्रायल किया जाएगा। इस ट्रायल के सफल होते ही स्प्रे ड्रोन भी बागबानों के लिए मार्केट में उपलब्ध हो जाएगा।

इसके आगामी चरण में सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग अब इसके आगामी चरण में सेब या फलों की पेटी को ही सीधे बागीचे से सडक़ या घर तक पहुंचाने के लिए ड्रोन तैयार कर रहा है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के आईटी मैनेजर नरेंद्र ने बताया कि विभाग द्वारा सेब या फलों की पेटी के ड्रोन का डिजाइन तैयार किया जा रहा है।

स्प्रे ड्रोन के सार्थक परिणाम

सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक मुकेश रेपसवाल ने बताया कि प्रदेश सरकार की ड्रोन पॉलिसी को धरातल पर उतारने के लिए विभाग पूरी तरह से प्रयासरत है।

जहां दवाइयों व सैंपल लेने के लिए ड्रोन मार्केट में उतार लिया गया है, वहीं स्प्रे ड्रोन का पहला ट्रायल कर लिया गया है, जिसके सार्थक परिणाम आए है।

द्वितीय चरण में ट्रायल पूर्ण होते ही इसे कार्मशियलाइज कर दिया जाएगा, जबकि सेब या फलों की पेटी लाने के लिए ड्रोन का डिजाइन तैयार किया जा रहा है और डिजाइन तैयार होते ही इसका भी ट्रायल करके मार्केट में उतार लिया जाएगा।

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