डैणवाँस: देवताओं और डायनों के युद्ध का फ़ैसला हुआ ‘पैनल्टी शूटआऊट’ से

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जोगिन्दरनगर।। भादो महीने में देवों और डायनों के बीच हुए अदृश्य युद्ध में डायनों की जीत होने का दावा किया गया है। मंडी के सेहली में माता बगलामुखी मंदिर आयोजित जाग में यह घोषणा की गयी है।

 

जानकारी के अनुसार भाद्रपद माह में 3-3 युद्ध देवताओं और डायनों ने जीते हैं जबकि घोघरधार में हुआ अंतिम युद्ध बराबरी पर रहा। इसके बाद परंपरा के अनुसार हार-जीत का फ़ैसला शिख पाथा (अनाज) से हुआ जिसे डायनों ने जीत कर इस पूरे युद्ध में जीत हासिल की है।

शिख पाथा से हार जीत से फ़ैसला ठीक वैसा है जैसे फ़ुटबाल में हार-जीत का फ़ैसला पैनल्टी शूट आउट से होता है, या क्रिकेट में सुपर ओवर से।

उदघोषणा के अनुसार, डायनों की जीत होने से अगले एक वर्ष में अल्प मौतें, भूकंप, बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि होगी। वहीं देवताओं ने लोगों को विश्वास दिलाया है कि वे इस अवधि में डायनों का प्रकोप नहीं होने देंगे और सभी भक्तों की रक्षा करेंगे।

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घोघरधार- जहां पर देवताओं और डायनों के बीच हर साल होता है निर्णायक युद्ध
घोघरधार- जहां पर देवताओं और डायनों के बीच हर साल होता है निर्णायक युद्ध

ग़ौरतलब देवताओं और डायनों के बीच होने वाले युद्ध का परिणाम ऋषि पंचमी और गणेश चतुर्थी को विभिन्न मंदिरों में देवी देवताओं के गुर या पुजारी बताते हैं। अगर देवताओं की जीत हो तो सारा साल सुखमय रहता है, लेकिन फसलों के लिए अच्छा नहीं होता है। वहीं  अगर डायनों के जीतने पर जान-माल का नुक़सान होता है, जबकि फसल अच्छी होती है।

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