सबकी मनोकामना पूर्ण करती है माँ चतुर्भुजा

जोगिन्दरनगर से कुछ ही दूरी पर बसाही धार की सुन्दर पहाड़ी में स्थित है माँ चतुर्भुजा का यह मंदिर. नवरात्रों में यहाँ भक्तों की खूब भीड़ लगती है. रात्रि जागरण द्वारा माँ की महिमा का गुणगान भी किया जाता है तथा भंडारे का भी आयोजन होता है. लोग दूर -दूर से माँ का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहाँ आते हैं.कहा जाता है कि माँ का यह मंदिर पांडवों ने बनाया था. यह मंदिर समुन्द्र तल से 4830 फीट की ऊँचाई पर स्थित है.

पांडवों ने बनाया था यह मंदिर

माँ का यह मंदिर जोगिन्दरनगर से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.कहा जाता है कि माँ का यह मंदिर पांडवों ने बनाया था. यह मंदिर समुन्द्र तल से 4830 फीट की ऊँचाई पर स्थित है.  यहाँ माँ चतुर्भुजा दुर्गा माँ के नौ रूपों में से चतुर्भुज रूप में वास करती हैं. यहाँ 100 फीट ऊंचा टीवी टावर भी स्थित है.

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नवरात्रों में लगते हैं मेले

नवरात्रों के समय यहाँ मेलों का आयोजन किया जाता है. भक्त लोग दूर दूर से यहाँ आते हैं. मंदिर तक पहुँचने के लिए बान और चीड़ के घने जंगल के बीच में से संगमरमर का बना हुआ रास्ता है. इस रास्ते का निर्माण भक्तों के सहयोग से किया गया है. जगह जगह विश्राम स्थल तथा पीने के पानी की सुविधा सहित शौचालय की सुविधा भी है.

पैदल चढ़ाई कर आते हैं भक्त

कई भक्त सुबह की आरती में शामिल होने के लिए आस पास के गाँवों से सुबह लम्बी चढ़ाई चढ़ कर मंदिर तक पहुँचते है. नाग पंचमी के अवसर पर यहाँ बहुत बड़ा मेला लगता है तथा भारी भीड़ होती है. भक्त यहाँ पहुँच कर माँ की पूजा अर्चना करते हैं तथा माँ का आशीर्वाद प्राप्त कर धन्य हो जाते हैं.

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ब्यास नदी का दिखता है सुंदर नजारा

मंदिर परिसर से आस पास की सुंदरता देखते ही बनती है. मंदिर के एक तरफ बिल्कुल नीचे ब्यास नदी का सुन्दर नज़ारा देखने को मिलता है. जोगिन्दरनगर से हर समय यहाँ के लिए बस सुविधा मौजूद रहती है.

माँ की महिमा का होता है गुणगान

नवरात्रों में यहाँ खूब रौनक रहती है. भक्तों की भारी भीड़ होती है. इसके साथ -साथ भंडारों का भी आयोजन किया जाता है. भक्तजन दूर- दूर से यहाँ माथा टेकने आते हैं तथा अपने आपको धन्य मानते हैं.

बस और टैक्सी सेवा होती है उपलब्ध

बस के अलावा जोगिन्दरनगर से मंदिर के लिए टैक्सी की सुविधा भी मिल जाती है. चंडीगढ़ से मंदिर की दूरी मात्र 296 तथा दिल्ली से 541 किलोमीटर है.

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