30 जून तक टला प्रदेश में स्कूल -कालेज खोलने का फैसला

शिमला : हिमाचल प्रदेश के शिक्षण संस्थानों को  खोलने का फैसला 30 जून तक टल  गया है। अब 30 जून के बाद केंद्रीय सरकार से आने वाली गाइडलाइन के बाद हो स्कूलों को खोलने पर कोई निर्णय सरकार द्वारा लिया जाएगा। हालांकि अभी सरकार यह भी विचार कर रही है कि 12 जुलाई तक स्कूल व कालेजों में अवकाश कर दिया जाए। दरअसल अभी सरकारी स्कूलों में साल में होने वाली 52 छुट्टियों में से सात दिन बचे है, ऐसे में अभी 45 छुट्टियां स्कूलों ने पूरी कर दी है।

कालेजों में भी बची 18 छुट्टियाँ

इसके साथ ही अगर कालेजों कि बात करे तो वहां पर भी 63 में से 45 छुट्टियां पूरी हो चुकी है। ऐसे में सरकार के पास कालेजों में भी 18 छुट्टियां बची हैं। यही वजह है कि सरकार अंदरखाते में यह भी विचार कर रही है कि स्कूल और कालेज की  बची छुट्टियों को भी इस लॉकडाउन में पूरा कर लिया जाए। फिलहाल इस पर भी केंद्रीय मंत्रालय से होने वाली बैठक का ही इंतजार किया जा रहा है।

अवकाश होंगे कम

30 जून को अंतिम फैसला शिक्षा व्यवस्था को लेकर लिया जाएगा। जानकारी के अनुसार अगर सरकार को छुट्टियां आगे बढ़ानी पड़ी, तो उसके बाद स्कूल और कालेज में शैक्षणिक सत्र पूरा करने के लिए दूसरे शनिवार को भी अडजेस्ट किया जाएगा। यानी एक बार कक्षाएं स्कूलों में शुरू हुई, तो अवकाश कम कर दिए जाएंगे। यहां तक कि त्योहारों में होने वाले अवकाश भी सरकार रद्द कर सकती है।

3 माह से बंद पड़े हैं स्कूल

गौर हो कि प्रदेश में शैक्षणिक संस्थान दो तीन माह से बंद पड़े है। छोटे से लेकर बड़ी कक्षाओं कि पढ़ाई ऑनलाइन भरोसे है। सरकारी स्कूलों की अगर बात करें, तो वहां ऑनलाइन पढ़ाई से भी छात्रों को वंचित रखा जा रहा है। सरकारी स्कूल के छात्रों की पढ़ाई ज्यादा खतरे में है। यह भी कारण है की शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को स्कूल बुलाने पर प्रोपोजल भी बनाया था। हालांकि सरकार तक आने से पहले ही वह प्रोपोजल रिजेक्ट हो गया।

सीएम को करवाया अवगत

ऐसे में यह भी देखना होगा कि 30 जून के बाद केंद्रीय मंत्रालय के साथ चर्चा के बाद क्या फैसला लिया जाता है। अहम यह रहेगा कि स्कूलों में शिक्षकों को बुलाया जाता है या नहीं। शनिवार को भी सचिवालय में सीएम की अध्यक्षता में बैठक रखी गई। बैठक में शिक्षा विभाग के सभी निदेशकों ने विभाग में चल रहे कार्यों के बारे में सीएम को अवगत करवाया। वहीं इस साल शिक्षा व्यवस्था को कैसे पटरी पर लाना है इस पर भी विचार किया गया।

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