बाथू की लड़ी – रहस्यमय मंदिर जहां पांडव स्वर्ग तक सीढ़ी बनाने लगे, जानिए फिर क्या हुआ!

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सीमा कुमारी।।

बाथू की लड़ी मंदिर भारत के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। इस अद्भुत चमत्कारी मंदिर की सुन्दरता देखते ही बनती है। इस मंदिर के बारे में यह मान्यता है कि यह मंदिर लगभग 5000 वर्ष पुराना है।

बाथू की लड़ी मंदिर भारत देश के हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिला में है। यह मंदिर पौंग बांध (महाराणा प्रताप सागर) में स्थित है। यह पौंग बांध का निर्माण होने पर यह मंदिर पूरी तरह से जलमग्न हो गया।

इसे बाथू की लड़ी के नाम से इसलिए जाना जाता है क्योंकि इसकी इमारतें बाथू नामक पत्थर से बनी हैं। जब यह पानी में डूब जाता है तो दूर से देखने से ऐसा लगता है जैसे मोतियों की माला हो जिनको लड़ियों में पिरोया गया है इसलिए इसे बाथू की लड़ी कहा जाता है।

इस मंदिर की खासियत है कि यह केवल चार महीने तक ही दिखता है और आठ महीने तक पानी में डूबा रहता है।  यह मंदिर बहुत ही रहस्यमयी व अद्भुत ढंग से निर्मित किया गया है।

इस मंदिर की उत्पत्ति में कई लोकगाथाएं प्रसिद्ध हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण स्थानीय राजाओं द्वारा किया गया जिन्होनें इस क्षेत्र पर शासन किया था।

कुछ मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण पांडवों द्वारा किया गया है। कहा जाता है कि पांडवों ने इसके निर्माण की शिला रखी थी। इस मंदिर से पांडवों ने स्वर्ग तक पहुँचने के लिए सीढ़ी बनाने के प्रयास किया था। लेकिन उनके पास पर्याप्त व उचित समय का आभाव था।

इसके लिए पांडवों ने श्रीकृष्ण से सहायता मांगी थी कृष्ण के अनुसार इसका इसका निर्माण रात को ही करना था इसीलिए छह महीने तक सुबह नहीं हुई। अर्थात छह महीने की रात कर दी गई थी लेकिन उस समय में भी पांडव स्वर्ग तक सीढ़ी बनाने में कामयाब नहीं हुए और अढ़ाई सीढ़ियाँ बनाना शेष रह गई थीं।

इस मंदिर में सीढ़ियाँ अभी भी मौजूद हैं। यह मंदिर भगवान शिव और पार्वती माता को समर्पित है। इसमें गणेश व विष्णु भगवान की मूर्ति भी स्थापित की गई है। जब इस मंदिर में पानी कम हो जाता है तो नाव में इस मंदिर तक जाया जा सकता है।

मंदिर के बारे में ऐसी भी मान्यता है कि जब सूर्यास्त होने लगता है तो सूर्य की किरणें इस मंदिर में स्थित शिवलिंग को स्पर्श करती हैं। इस मंदिर में मुख्य मंदिर शिवलिंग ही है। इस मंदिर के दर्शन हेतु पर्यटक न केवल भारत अपितु विदेशों से भी आते हैं।

यह स्थान प्रवासी पक्षियों के निवास स्थान के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ पक्षी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। मंदिर के आसपास का दृश्य बहुत ही मनमोहक है।

मंदिर के चारों ओर पानी और बीच में मंदिर का समूह बहुत ही अद्भुत व सुन्दर दिखाई देता है। इस मंदिर में हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले की ज्वाली तहसील से होकर आने वाली सड़क के द्वारा पहुंचा जा सकता है। यह लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

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